कोलकाता, 01 सितम्बर। डाक्टरों को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। डाक्टर अपने दिलासा, विश्वास व मुस्कान के सहारे चिकित्सा उपचार कर रोगी का कष्ट दूर करता है। डाक्टर का स्वभाव मृदुल होना चाहिए। हमारे देश में कई चिकित्सा जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी और ऐलोपैथी के अलग-अलग डॉक्टर होते हैं। डाक्टर का कार्य रोगों का निदान करना है। जब भी हम बीमार पड़ते हैं तो हमें डाक्टर की शरण लेनी पड़ती है। बुखार से लेकर गंभीर रोगों में डाक्टर ही हमारी पीड़ा दूर करता है। डाक्टरों का जीवन सेवा और साधना का होता है। कई बार ऑपरेशन के दौरान डाक्टर को कई-कई घंटे काम करना पड़ता है। वह आराम से सो भी नहीं पाता। सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों को कई-कई घंटे रोगियों को देखना पड़ता है। रोगी की स्थिति गंभीर होने पर उनकी रात में कई-कई बार जाँच करनी पड़ती है। डाक्टर मनुष्य को जीवन-दान दे कर उस पर उपकार करता है।
सामान्य रोगों में कोई भी डाक्टर इलाज कर लेता है पर दुर्घटना होने पर, गुर्दे खराब हाने पर, नेत्र ज्योति नष्ट होने पर व इत्यादि परिस्थितियों में हमें विशेषज्ञ व शल्य चिकित्सक का ही सहारा लेना पड़ता है। डाक्टर ऑपेरशन के द्वारा ही हमें नव जीवन प्रदान करता है। टी०बी०, पक्षधात, हृदय रोग, कैंसर आदि बीमारियाँ डाक्टर ही बड़े प्रयत्न से ठीक कर पाता है।
आज का युग पैसे का युग है । निःसन्देह डाक्टरों को भी अपने परिवार के लिए अधिकाधिक पैसे कमाने की चाह होती है। अनेक बेहतरीन डाक्टरों की फीस इतनी ऊँची होती हैं कि हमारे समाज के अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर लोग उनकी सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाते। हमारे समाज के वे लोग जो आर्थिक रूप से कमजोर है उनके लिए रोग एक अभिशाप समान है तभी तो निर्धन रोगी धन के अभाव में तड़प तड़पकर मर जाता है।
पिछले कुछ महीनों से पश्चिम बंगाल के डाक्टरों पर मानो ग्रहण सा लगा हुआ है। विभिन्न घटनाओं जैसे मार-पीट, छिनतई, शारीरिक शोषण व अन्य प्रकार के अपराध का आचरण सरकारी व गैर-सरकारी डाक्टरों के साथ व्यवहार किया जा रहा है जिस पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न संगठनों के डाक्टर एक होते हुए अपने आत्मा-सम्मान के लिए आवाज़ बुलंद करते नज़र आ रहे हैं। वहीं राज्य सरकार द्वारा घटनाओं को नज़र अंदाज़ करने व पुलिस द्वारा उचित कार्यवाही न करने पर डाक्टर राज्य के शासक व पुलिस प्रशसन को भी जिम्मेदार मानते हैं। दिन प्रति दिन बढ़ती घटनाएँ व मौन पड़ी पुलिस की कार्यवाही चिंता का विषय है।
कोलकाता के सुबोध मलिक स्कवेर स्थित डा० बी० सी० राय हाउस के सामने 1 सितम्बर को सैकड़ों डाक्टरों की मौजूदगी में प्रतिवाद सभा का आयोजन किया गया जो दोपहर 2 बजे के लगभग आरम्भ हुआ व तीन घण्टे चला। विभिन्न जिलों से करीबन साढ़े तीन सौ डाक्टरों की उपस्थिति इस प्रतिवाद सभा में होनी थी जिसमें सभा से पहले व सभा के दौरान डाक्टरों का आना हो रहा था। वहीं मंच से अनेक डाक्टरों ने अपनी बात रखी व शांतिपूर्वक अपने आवाज़ को बुलंद करने की बात कही। एक ओर जहां उन्होने स्वास्थ्य विभाग के तंत्र पर उंगली उठाई वहीं उन्होने राज्य सरकार व पुलिस की धीमी कार्यवाही पर सवाल उठाया। साथ साथ “ज़ीरो टोलरेंस, नो एक्सक्यूज फॉर एब्यूज”, सेय नो टु वायलेंस एट वर्कप्लेस” सहित अनेकों बैनरों को डाक्टरों ने थामते हुए लोगों को संदेश देने का कार्य किया। इस प्रतिवाद सभा “सीट-इन-डेमोनस्ट्रेशन में डाक्टरों के अलावा सैकड़ों की तादाद में विभिन्न क्षेत्र के लोग भी उपस्थित रहे।
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