बैंंक हड़ताल के दौरान 30-31 मई को एटीएम भी रहेंगे बंद



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 29 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

बैंक कर्मचारियों की ओर से तीन बार बैंक हड़ताल की गई थी। लेकिन यह हड़ताल वेतन वृद्धि के बजाए लोगों के हितों के लिए की गई थी। जिससे बैंकिंग कारोबार प्रभावित नहीं हो और बैंक के ग्राहकों को नुकसान नहीं हो। लेकिन केंद्र सरकार की ओर बैंकों की हालत खराब बताते हुए विलय पर जोर दिया जा रहा है। जबकि बैंक संगठनों का मानना है कि अपनी मर्जी से रकम नहीं लौटाने वाले (विलफुल डिफाल्टरों) के कारण हालात ऐसे दिख रहे हैं। आरबीआइ की ओर से ऐसे लोगों के रकम उगाहने के बजाए कर्ज माफ करके हालत को खराब कियाजा रहा है।

बैंक कर्मचारी संगठन की ओर से आगामी 30 और 31 मई को दो दिनी बैंक हड़ताल की जा रही है। इस दौरान राज्य में बैकों की करीब 10000 शाखाएं, 21000 एटीएम बंद रहेंगे और 70 हजार कर्मचारी हड़ताल में सामिल होंगे।

युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन (यूएफबीयू) की राज्य शाखा से संयोजक सिद्धार्थ खाँ ने बताया कि वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर हड़ताल की जा रही है। उनका कहना है कि आखरी बार वेतन में परिवर्तन 2012 में हुआ था और कर्मचरियों के वेतन में 15 फीसद की वृद्धि हुई थी। इस बार कर्मचारियों की ओर से 30 फीसदी वेतन वृद्धि की मांग की जा रही है। लेकिन महज दो फीसद वेतन वृद्धि की गई है।

मालूम हो कि एआइबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीईएफ, आईएनबीओसी, एनओबीडब्लू संगठनों की ओर से पार्थ चंद्र, जयदेव दासगुप्ता, सिद्धार्थ खाँ, संजय दास, पवित्र चटर्जी, निर्मल दत्त की ओर से बैंक हड़ताल को सफल बनाने की मांग करते हुए कहा गया है कि विलफुल डिफाल्टरों के कारण बैंक घाटे में दिख रहे हैं, जबकि पहले बैंक फायदे में चलते थे। इनका कहना है कि अगर यह रकम वापस लौटाने के लिए कोशिश की जाए, तब फायदा हो सकता है। हड़ताल के दौरान देश के करीब एक लाख 40 हजार बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

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