---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 02 जून 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● सर्किल रेट पर मकानों की खरीददारी क्यों नहीं, जदयू युवा के प्रदेश अध्यक्ष ने की सीबीआई जांच की मांग
पुरानी कहावत है कि राजा को पता ही नहीं मुसहर वन बांट लिये। इस कहावत को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के अधिकारी चरितार्थ कर रहे है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के नाम पर विश्वनाथ मंदिर प्रशासन मंदिर के आसपास प्राचीन मकानों को सर्किल रेट की बजाय मुहमांगी रकम पर खरीदे भवनों और मंदिरों को तोड़ने की कार्रवाई कर रहा है। आवासीय भवनों को व्यवसायिक दिखाकर डेढ से दोगुना कीमत चुकता कर खरीदा गया। मजेदार बात यह है कि कारिडोर का अब तक कोई कार्ययोजना ही नहीं बन पाया है। यह मामला इसी बहाने काशी में जमे रहने की मंशा पाले अधिकारियों की कारस्तानी है।
इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को अंधेरे में रखा गया। बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोंदी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2017 में विश्वनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए 600 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई थी। उस विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर अवमुक्त धनराशि बताया जा रहा जबकि ऐसा नहीं है। कभी अधिकारियों द्वारा इसे पीएम का ड्रीम प्रोेजेक्ट बताया गया था। ड्रीम प्रोजेक्ट चाहे जिसका हो पर पहले उसकी कार्ययोजना तो तैयार होनी चाहिए थी। कारिडोर के निर्माण की कार्ययोजना बनाये बिना किस आधार पर प्राचीन भवनों और मंदिरों को गिराने का सिलसिला शुरु कर दिया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मकान गिराने और मंदिर तोड़ने की इजाजत कहीं से किसी ने नहीं दी है। ऐसा कोई रिकार्ड मंदिर प्रशासन के पास भी नहीं है।
गत 18 मई को हुई श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में भी यह प्रस्ताव लाया गया था। न्यास परिषद की बैठक के लिए तैयार एजेंड के दूसरे नंबर पर ही इसे रखा गया था। मंदिर प्रशासन के आर्किटेक्ट की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव में कहा गया है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के निकट काफी भवन खरीद कर गिरा दिए गए हैं। काफी जगह खाली हो गई है। इस पर न्यास परिषद ने सर्वसम्मति से तय किया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण, सौंदर्यीकरण योजना के तहत भवनों की खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है, ऐसें में परियोजना के अंतर्गत सभी भवनों की पहले खरीदारी की प्रक्रिया पूरी की जाए। उसके बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजा जायेगा।
इस बाबत जनता दल यूनाईटेड युवा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद पटेल ने अधिकारियों पर विश्वनाथ मंदिर परिसर में मनमानी कर सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया है। उन्होने आरोप लगाया है कि यदि मंदिर परिसर में मकान ही खरीदी गई तो उसको सर्किल रेट पर क्यों नहीं खरीदा गया। उन्होने प्रधानमंत्री से यह मांग की है कि यदि मंदिर परिसर में मकानों की खरीद फरोक्त की सीबीआई जांच हो जाय तो बड़े घोटाले से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होने कहा कि काशी की जनता के बीच कारिडोर के नाम पर सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है। ललिता घाट पर नेपाल राजपरिवार द्वारा निर्मित प्राचीन पशुपतिनाथ के मंदिर को तोड़ने की बात की जाती रही जिसका खुलासा होने पर मामला नेपाल के विदेश मंत्री तक पहुंचा और 11 मई के प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा के दौरान यह मसला उठने की आशंका बलवती हुई तो केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक सक्रिय हो गयी।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें बार-बार यह समझाया, धमकाया और प्रलोभन दिया जा रहा है कि भवन बेंच दें। इसके पीछे मंदिर प्रशासन की मंशा साफ है कि वह जल्द से जल्द परिक्षेत्र के 166 भवनों को खऱीद ले ताकि विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना की कार्ययोजना तैयार हो सके। न्यास परिषद की बैठक की कार्यवाही यह बताती है कि प्रधानमंत्री ने दरियादिली दिखाते हुए 2017 में विश्वनाथ मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए जो 600 करोड़ रुपये दिए थे स्थानीय अधिकारियों ने उसको मनमाने ढंग से ख़र्च करने के लिए, विश्वनाथ कॉरिडर का ख्याली नक़्शा खींचा और बताने लगे कि 60 फ़ीट चौड़ा पाथ वे और विश्वनाथ जी के चरणों में मां गंगा की धारा लाई जाएगी। यह सब कपोल कल्पित है। इस मामले में प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखा गया है। किसी के पास ये ऑर्डर नहीं है कि किसके कहने से, पिछले महीने विश्वनाथ मंदिर के आसपास के मकान तोड़े गए।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि जब कोई कार्ययोजना ही तैयार नहीं है तो क्यों व्यास मंदिर को तोड़ा गया, विश्वनथ मंदिर के आस-पास के मंदिरों को ध्वस्त किया गया। काशी के 56 विनायकों में से दो विनायक के मंदिर किसके आदेश पर तोड़े गए। आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले मंडन मिश्र की प्रतिमा को किसके आदेश के जमींदोज किया गया।
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