---प्रकाश पाण्डेय, कोलकाता, 05 जून 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ ''समग्र शिक्षा केवल नाम नहीं है, बल्कि एक नव सोच है। शिक्षा को टुकड़ों में बांटकर नहीं देखा जा सकता है। यह योजना प्री-स्कूल से कक्षा 12वीं तक समग्र शिक्षा का एक ठोस नजरिया है। इससे डिजिटल व समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।''
महानगर के पार्क होटल में एसोचैम और लिटिल लोरिएक्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्री-स्कूल एजुकेशन परिचर्चा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव अनिल स्वरुप ने शिरकत किया। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा केवल नाम नहीं है, बल्कि एक नव सोच है। शिक्षा को टुकड़ों में बांटकर नहीं देखा जा सकता। सर्व शिक्षा अभियान के 25 साल बाद समय की मांग के हिसाब से समग्र शिक्षा योजना लाई गई है। यह योजना प्री-स्कूल से कक्षा 12वीं तक समग्र शिक्षा का एक ठोस नजरिया है। इससे डिजिटल व समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। हम देश के लोगों व संस्थाओं के साथ ही निजी संचालकों से भी प्री-स्कूल एजुकेशन विषय पर उनकी राय व विचारों को एकत्र कर रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि अच्छे विचार व उपाय कहीं से भी मिल सकते हैं। हमें हमेशा अच्छे चीजों को संग्रहित करने के लिए तैयार रहना चाहिए। समय के साथ तकनीक ने काफी कुछ आसान कर दिया है। प्री-स्कूल की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्री स्कूल की अहमियत इस लिए भी अधिक है क्योंकि इन स्कूलों में बच्चों के अंदर जागरुकता के साथ ही तकनीकी माध्यम से उन्हें जोड़ा जाता है और खेल व अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर उन्हें आगे के लिए तैयार किया जाता है। फिलहाल इसके स्वरुप पर चर्चा हो रही है और आगामी 30 जून तक इसकी विधि व नीति तैयार कर ली जाएगी और सभी को इससे अवगत करा दिया जाएगा।
एसोचैम की पूर्व- व उत्तर पूर्व की डायरेक्टर परमिन्दर कौर ने कहा कि एसोचैम और लिटिल लोरिएक्ट्स ने इस दिशा में पहले से ही काम शुरू कर दिया है और "पहले प्री-स्कूल" नाम से विशेष कार्यक्रम चलायी जा रही है। जिसका महज एक ही उदेश्य है कि बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मुहैया हो और इसी क्वालिटी एजुकेशन को अगर आगामी दिनों में सरकारी स्कूल में लागू किया जाता है तो भारी संख्या में गरीब व गांवों के बच्चों को ही इसका सीधा लाभ मिलेगा।
वहीं एसोचैम के पूर्वी अंचल के स्कूल एजुकेशन काउंसिल के चेयरमैन तामल मुखर्जी ने कहा कि आने वाले समय में इसकी अहमियत को भापते हुए सरकार के समक्ष इसके स्वरुप को रखा गया। इतना ही नहीं उन्होंने अलग से बोर्ड स्थापना संबंध प्रस्ताव को तैयार कर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव अनिल स्वरुप को दिया। आगे उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो भारी संख्या में महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकेगा, साथ ही गांव खेड़ों के युवाओं के लिए भी संभावनाएं बढ़ेंगी और इसके जरिए विदेशी निवेश को लाया जा सकता है।
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