कमीशन वेण्डर्स ने भाजपा संगठन के नेतृत्व में निकाला जुलूस



हावड़ा, 18 सितम्बर। कमीशन वेण्डर्स ने भाजपा संगठन के पश्चिम बंगाल असंगठित ट्रेड यूनियन के नेतृत्व में जुलूस निकाला व पथ सभा की। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में यह जुलूस हावड़ा स्टेशन पार्सल स्थित मनोकामना मन्दिर से प्रारम्भ हुआ व ओल्ड कोम्प्लेक्स स्थित स्टालों, उप स्टेशन प्रबन्धक कार्यालय, नॉर्थ विंग आई०आर०सी०टी०सी० कार्यालय, न्यू कोम्प्लेक्स स्थित स्टालों, रेलवे मजिस्ट्रेट कोर्ट होते हुए मण्डल रेल प्रबंधन (डी०आर०एम०) कार्यालय पहुँचा जहां जुलूस पथ सभा में परिवर्तित हो गयी।

जुलूस दौरान उप स्टेशन प्रबन्धक के० एन० नसकर के विरोध में जमकर नारेबाजी की गयी। जानकारी दी गयी कि चंद पैसों के लिए नसकर ने गैरकानूनी तरीके से रेलवे पुलिस की मदद से 2 स्टालों (सी०डी०-8 व सी०डी०-14 को जिस पर मामला चल रहा है और धारा 144सी लागू है) को किसी ओर को दे दिया है जिसका कमीशन वेण्डर्स एंड हेल्पर्स तथा लाइसैन्स पोर्टस से कोई लेना देना नहीं है।

वहीं जुलूस जब नॉर्थ विंग आई०आर०सी०टी०सी० कार्यालय पहुँची तो कैटरिंग प्रबन्धक नदारद दिखें। बहुत देर तक कार्यालय में नारेबाजी की गयी। साथ साथ सुरेश प्रसाद गुप्ता ने अपना वक्तव्य रखते हुए धमकी भरे शब्दों में चेताया व कहा कि बेवजह फाइन लगाकर व वजह पूछने पर वेण्डर्स के कमीशन से राशि काट लिया जाता है। इसका हम विरोध करते हैं व मांग भी करते हैं कि उसे जल्द से जल्द वापस किए जाए अन्यथा इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे। हम अपने हक के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह सरासर बेईमानी व जालसाझी है। सुरेश प्रसाद गुप्ता ने डी०आर०एम० कार्यालय के समक्ष भी कमीशन वेण्डर्स एंड हेल्पर्स तथा लाइसैन्स पोर्टस की मांगों को भी अपने वक्तव्यों में उठाया। हावड़ा रेलवे स्टेशन कैटरिंग वेण्डर्स एंड हेल्पर्स मोर्चा के उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर जाना व कार्यकारी अध्यक्ष अजय सिंह ने भी अपने वक्तव्यों में कड़े शब्दों का प्रयोग किया। रेल सेवकों की बहाली का भी मुद्दा उठाया।

डी०आर०एम० कार्यालय के समक्ष पश्चिम बंगाल असंगठित ट्रेड यूनियन, हावड़ा मण्डल के महासचिव देवनारायण मण्डल ने पथ सभा दौरान अपने वक्तव्यों में मृत अथवा वृद्ध कमीशन वेण्डर्स का बैच उनके वैध वारिसों के नाम स्थानांतरण, नष्ट स्टालों का पुनः संचालित, कमीशन से काटा गया गैरकानूनी जुर्माने की वापसी, रेल सेवकों की वापसी जैसे मांगों पर जोर दिया। उन्होने रेलवे पुलिस व रेलवे कांट्रैक्टरों पर भी आरोप लगाया व कहा की पैसों के लिए कांट्रैक्टर मजदूरों का हक खा जाते हैं, पूरी मजदूरी भी नहीं देते हैं। वहीं रेलवे पुलिस भी रेल अधिकारियों संग साठ-गांठ करते हुए बिना आधिकारीक अनुमोदन हाकरों को बढ़ावा दे रहे हैं व मोटी कमीशन खा रहे हैं। जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से आई०आर०सी०टी०सी० अधिकारियों के आँख चढ़ा ली है व परिणाम स्वरूप 2015 से स्टाल नष्ट करना व रेल सेवकों की छटनी की गयी है।

कमीशन वेण्डर्स एंड हेल्पर्स तथा लाइसैन्स पोर्टस की मांग
• मृत व वृद्ध कमीशन वेण्डर्स का बैच उनके वैध वारिसों के नाम स्थानांतरण
• नष्ट किए गए व बंद स्टालों का पुनः संचालित करना
• गैरकानूनी तरीके से चल रहे स्टालों को बंद करना
• कमीशन वेण्डर्स के विश्रामगृह की मरम्मत
• कमीशन से काटा गया गैरकानूनी जुर्माने की वापसी
• बिना सूचना व कारण बताए स्टालों को नहीं बंद करना

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