मोदी के दौरे से पहले ममता का मास्टर स्ट्रोक !



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 09 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

फसल के सहायक मुल्य में वृद्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पश्चिम बंगाल दौरे के पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मास्टर स्ट्रोक के तहत किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। इसके तहत राज्य में फसल खरीदने के केंद्रों की संख्या 350 से बढ़ा कर 1200 करने, रविवार समेत छुट्टी के दिन भी धान खरीदने, भीड़ ज्यादा होने पर राज्य सरकार की ओर से किसानों को ड्यू स्लीप देने का फैसला किया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को धान बेचने वाले किसानों की संख्या को 17 लाख से बढ़ा कर 25 लाख करने का लक्ष्य तय किया गया है।

मालूम हो कि धान का न्यूनतम खरीद मुल्य प्रति क्विंटल 200 रुपए वृद्धि करने के बाद इसका राजनीतिक फायदा लूटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से देश भर में सभाएं की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मेदिनीपुर में रैली करने के लिए आ रहे हैं।

केंद्र की चाल से ही उसे मात देने के लिए राज्य सरकार किसानों को और ज्यादा मूल्य देने समेत दूसरी सुविधाओं को लेकर मैदान में उतर गई है। आगामी खरीफ फसल से धान की बढ़ी हुई कीमत से खरीद शुरू होगी, लेकिन तीन महीने पहले ही राज्य सरकार ने काम शुरू कर दिया है।

सूत्रों ने बताया कि केंद्र की ओर से खरीद दर में वृद्धि का एलान किए जाने के दूसरे दिन ही धान खरीदने के बारे में खाद्य विभाग की महत्वपूर्ण बैठक में कई फैसले किए गए। ज्यादा से ज्यादा किसानों से ज्यादा धान खरीदने के लिए अभी से कोशिश शुरू कर दी गई है।

खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का कहना है कि राज्य सरकार को ज्यादा कीमत पर धान बेच कर किसान ममता बनर्जी की सरकार के साथ ही रहेंगे। धान की कीमत बढ़ाने के बाद भी राज्य में भाजपा को कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलेगा। इसे ममता का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

देश के जिन राज्यों में धान खरीदने की प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण किया गया है, पश्चिम बंगाल उसमें शामिल है। राज्य सरकार की अपनी खाद्य सुरक्षा परियोजना के लिए राज्य को अतिरिक्त धान खरीदना पड़ता है। राज्य के खाद्य विभाग समेत कई सरकारी संस्थाएं न्यूनतम संग्रह मुल्य देकर धान खरीदती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम संग्रह मुल्य घोषित करने से ज्यादा महत्वपूर्ण राज्य सरकार का फैसला है क्योंकि ज्यादातर राज्यों में घोषित मुल्य से कम कीमत पर किसान फसल बेचने को मजबूर होते हैं। राज्य सरकार की ओर से न्यूनतम संग्रह मुल्य पर धान खरीदे जाने की केंद्र ने भी प्रशंसा की है और किसान भी सस्ते में फसल बेचने को मजबूर नहीं होते। फिलहाल 17 लाख किसान राज्य को धान बेचते हैं, खाद्य मंत्री का मानना है कि न्यूनतम मुल्य में 200 रुपए प्रति क्विंटल वृद्धि के बाद धान बेचने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 25 लाख हो जाएगी। राज्य सरकार की ओर से विक्रय केंद्रों की संख्या 350 से बढ़ाकर 1200 की जा रही है, जिससे किसी भी किसान को फसल लेकर लौटना नहीं पड़े। धान खरीदने के लिए व्यापक तौर पर प्रचार किया जाएगा, पंजीकृत किसानों को एसएमएस भेज कर धान बेचने के लिए कहा जाएगा।

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