लखनऊ, 22 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥●॥ साहित्य-संगोष्ठी और इंडिया इनसाइड की साहित्य-वार्षिकी 2018 का विमोचन
इंडिया इनसाइड पत्रिका के तत्वावधान में ‘साहित्य की जरूरत : कल आज और कल’ विषयक एक संगोष्ठी का आयोजन आज़म हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में होने वाली इस संगोष्ठी में देश के कई भागों से सम्पादक, कहानीकार, आलोचक आदि ने भाग लिया।
कहानीकार साहित्य को जटिल होना चाहिए। जटिलता से मेरा आशय है साहित्य को दर्शन में समा जाना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंकज बिष्ट ने कहा कि एक लेखक अपने पाठकों को ही संवोधित करता है इसलिए पाठकों का होना बहुत ज़रूरी है। साहित्य एक बेहतर मनुष्य की आकांक्षा करता है। आज हिन्दी समाज का सबसे बड़ा संकट पाठक ख़त्म हो रहा है। बड़े व्यवसायिक संस्थानों को बंद कर दिया।
इस अवसर युवा आलोचक बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि साहित्य बचा रहेगा। साहित्य सम्पूर्ण मनुष्य का अध्ययन करता है। सोलह संस्कारों में एक संस्कार जोड़ना होगा। साहित्य बेहतर मनुष्य बनाता है। लेखक की जगह पाठक तैयार करना होगा।
ओमा शर्मा ने कहा कि साहित्य मूलत: और अंतत: कला है जब तक यह कला समाज की ज़रूरत पूरी करता रहेगा तब यह बचा रहेगा।
कवि-पत्रकार सुभाष राय ने कहा कि अंग्रेज़ी का व्यामोह हमें नष्ट करता है। आने वाले दिनों में सभी भारतीय भाषाओं पर संकट आने वाला है। श्री राय ने सवाल किया कि क्या इस संकट से बचने का कोई उपाय है ?
इस अवसर पर साहित्यकारों के अलावा साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र के बड़े दिग्गज जुटे। संगोष्ठी में साहित्य के भविष्य पर गर्मागर्म बहस की गई। इस अवसर पर अरुण सिंह के सम्पादन में प्रकाशित ‘इंडिया इनसाइड साहित्य वार्षिकी-2018’ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सम्पादक पंकज बिष्ट ने किया। कहानीकार प्रियंवद, ओमा शर्मा, इसके अलावा कथाकार शिवमूर्ति, पत्रकार-कवि सुभाष राय, कथाक्रम के सम्पादक शैलेन्द्र सागर, सामाजिक कार्यकर्ता अजय सिंह, कहानीकार देवेन्द्र, संस्कृतिकर्मी कौशल किशोर, लेखिका रजनी गुप्त, प्रज्ञा पाण्डेय, उषा राय संदीप कुमार सिंह, रंगकर्मी राजेश कुमार आदि शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन कहानीकार देवेन्द्र ने किया।
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