वाराणसी: 'राष्ट्रनिर्माण में सशस्त्र बलों की भूमिका' विषयक व्याख्यान का आयोजन



वाराणसी, 12 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के सभागार में छात्र अठिष्ठाता, बीएचयू तथा काशी मंथन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'राष्ट्रनिर्माण में सशस्त्र बलों की भूमिका' विषयक व्याख्यान का आयोजन शनिवार 11 अगस्त 2018 को हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारतीय थल सेना के लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) रामेश्वर यादव ने राष्ट्र निर्माण में सशस्त्र बलों की भूमिका पर चर्चा करते हुए राष्ट्र एवं राष्ट्रनिर्माण की अवधारणा बताते हुए अपने व्याख्यान की शुरुआत की। भारतीय उपमहाद्वीप के तमाम देशों का उदाहारण देते हुए उन्होंने सभी के भारतीय संस्कृति और भाषाओं के मूल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाकिस्तान भारतीय राष्ट्रीयता का उप-राष्ट्रीयता भर है। भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास के बारे में बताते हुए उन्होंने राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने हमेशा खुद को राजनीतिक मामलों से दूर रखते हुए अपनी परिपक्वता दिखाई। तिरंगा फहराने अथवा तिरंगे में लिपट के आने के जज़्बे के साथ सेना ने अपने टारगेट को हमेशा हासिल किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के संयोजक जॉइंट रजिस्ट्रार मयंक नारायण सिंह ने विषय के बारे में चर्चा करते हुए चाणक्य के कथन को उद्धत करते हुए बताया कि सेना का कार्य खजाना भरना या आर्थिक लेन देन करना नहीं बल्कि लोगों और भौगोलिक क्षेत्र की सुरक्षा करते हुए ऐसे हालात बनाना है जिसमें राज्य और उसके नागरिक आर्थिक क्रियाकलापों को करते हुए राज्य के खजाने भर सकें।

पाकिस्तानी आर्मी अपने निजि हितो के लिए हमेसा पाकिस्तान को ट्रीपल ए (अल्लाह, अार्मी और अमेरिका) से चलाता है।

काशी मंथन के बारे में उन्होंने बताया कि काशी मंथन का प्रयास राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को युवाओं सहित आम जनमानस की चेतना तक पहुँचाना है। इस अवसर पर छात्र अधिष्ठाता डॉ• एम• के• सिंह, ब्रिगेडियर बैसला, ब्रिगेडियर बारिक, कर्नल नायर, कर्नल साईं, डी• गांगुली, विक्रान्त कुश्वाहा सहित बीएचयू के शिक्षक, दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्रायें एवं एनसीसी बीएचयू के कैडेट्स उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ• सुमील तिवारी ने दिया।

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