जल संकट, कट्टरता और अर्थव्यवस्था से जूझ रहा पाकिस्तान



वाराणसी, 16 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ डेयरी विभाग के कामधेनु सभागार में लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और भारतीय राजदूत विवेक काटजू ने दिया व्याख्यान...

बीएचयू में शनिवार 15 सितम्बर को दोपहर 3 बजे डेयरी विभाग के कामधेनु सभागार में काशी मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में वार्ता का मुख्य विषय पाकिस्तान के आंतरिक और बाह्य नीतियों में होने वाले परिवर्तन और उसके विरोधाभास के साथ भारतीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव से युवाओं को जानकारी प्रदान करना था। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारत के अफगानिस्तान, म्यांमार और थाईलैंड में राजदूत रहे विवेक काटजू और लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, (कश्मीर के केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति) थे। जिन्होंने पाकिस्तान से संबंधित अलग अलग परिपेक्ष्य पर अपने विचार व्यक्त किए।

भारतीय राजदूत विवेक काटजू ने पाकिस्तान के आंतरिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना जिस धर्म निरपेक्षता की बात कही थी वह कही नहीं दिखाई देती है। 1974 में संवैधानिक संशोधन के माध्यम से अहमदी को मुस्लिम के श्रेणी से निकाल दिया गया। आतिफ मियां जो आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य थे उन्हें भी निकलने की बात कही गई। मगर इमरान खान ने इसका विरोध किया बाद में उन्होंने ही आतिफ को इस्तीफा देने की बात कही।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक नए पाकिस्तान के निर्माण की बात कही है। जिसके लिए पाकिस्तान के आंतरिक व्यवस्था में कुछ संरचनात्मक और क्रियात्मक बदलाव की आवश्यकता है। पाकिस्तान के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा उसके भारत विरोधी और इस्लामिक सिद्धान्त है। इसके अलावा पाकिस्तान आर्थिक और जल संकट से जूझ रहे है। जिस पर उसे विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अपने परंपरागत आर्थिक नीति में बदलाव की आवश्यकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पाकिस्तान एक दुःखी देश है क्योंकि वह अपने आपसे असंतुष्ट है।

इसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल रहे व कश्मीर के केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति सैयद अता हसनैन ने पाकिस्तान के विदेशी संबंधों पर प्रकाश डालते हुए पाकिस्तान और चीन की नीतियों से लोगो को अवगत कराया। इसके साथ उन्होंने हाइब्रिड युद्ध, प्रॉक्सी युद्ध, मनोवैज्ञानिक रणनीति पर प्रकाश डाला। इसके साथ भारत पाकिस्तान शांति सम्मेलनों के बारे में जानकारी प्रदान की। आतंकवाद से संबंधित मुद्दों की भी विवेचना की। आतंकवाद पर बंदिश लगाने के लिए उन्हें पैसा, इंसान और हथियार इन तीनों चीज़ों पर रोक लगाने की बात कही एवं कट्टरवाद पर भी अंकुश लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना अक्सर कोशिश करती है कि वह जिसे चाहे राजनैतिक फायदा पहुंचाए, वहा की हुकूमत में सेना का महत्त्वपूर्ण भूमिका है, ऐसे में नवाज शरीफ के बाद इमरान खान को फायदा पहुँचाया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इमरान खान जो बदलते पाकिस्तान की बात कर रहे है वह केवल भ्रमित कर रहे है क्योंकि पिछली सरकारों की तरह यह भी उन्ही गलतियों को दोहरा रहे है। यदि वह पाकिस्तान को बदलने की कोशिश करेंगे तो उन्हें आतंकवाद खत्म कर अर्थव्यवस्था में बदलाव करना होगा। पाकिस्तान के पास खूब पैसे है मगर सरकार के पास नहीं जो वहा के लचर व्यवस्था को दर्शाता है। उन्हें जम्मू-कश्मीर मसले की बात करते हुए कहा कि सच यह है कि राजनैतिक शक्तियां विवाद को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही जिससे पाकिस्तान का मनोबल बढ़ा है, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि पंजाब को जो हिस्सा पीओके के हिस्से में है वह भी हमारा हैं और हम उसे लेकर ही रहेंगे। इनके वार्ता समाप्ति के एक छोटा सा प्रश्न उत्तर कार्यक्रम रखा गया।

इस कार्यक्रम के सचिव मयंक नारायण ने अतिथियों का परिचय के साथ ही "काशी मंथन" के बारे में बताया। पंकज सिंह ने स्वागत उद्धबोधन तथा डॉ• सुमील तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अतिथियों का सम्मान छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो• एम• के• सिंह तथा प्रो• डी• सी• राय ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक मौजूद थे। देवाशीष गांगुली, दीपक, बिप्रम चौरसिया ने सहयोग किया।

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