प्रधानमंत्री का ताल्चर उर्वरक संयंत्र, ओडिशा की आधारशिला रखने के बाद संबोधन



ओडिशा, 22 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ प्रधानमंत्री का ताल्चर उर्वरक संयंत्र, ओडिशा की आधारशिला रखने के बाद संबोधन

मंच पर विराजमान उड़ीसा के राज्‍यपाल प्रोफ़ेसर गणेशीलाल जी, राज्‍य के मुख्‍यमंत्री, मेरे मित्र श्रीमान नवीन पटनायक जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान जुएल ओरम जी, श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान जी, संसद में मेरे साथी श्री सतपति जी, यहां के विधायक ब्रजकिशोर प्रधान जी, और प्‍यारे भाइयों और बहनों।

इसके बाद मुझे एक विशाल जनसभा में बोलना है और इसलिए मैं इसकी विस्‍तार से चर्चा यहां न करते हुए बहुत ही कम शब्‍दों में इस शुभ अवसर पर बोलूंगा। इसके कार्य के प्रति मैं प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करता हूं और समय-सीमा में इस प्रोजेक्‍ट को पूर्ण करने के लिए मैं संबंधित सभी लोगों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं भी देता हूं।

एक प्रकार से ये पुनरोद्धार का कार्य करने का मुझे सौभाग्‍य मिला है। कई दशकों पहले जो सपने बुने गए थे, लेकिन किसी न किसी कमियों के कारण वो सारे सपने ध्‍वस्‍त हो चुके थे। और यहां के लोगों ने भी आशा छोड़ दी थी कि क्‍या इस प्रोजेक्‍ट को, इस क्षेत्र को पुनर्जीवन प्राप्‍त हो सकता है क्‍या?

लेकिन हमने संकल्‍प किया है देश में नई ऊर्जा के साथ, नई गति के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, और उस संकल्‍प को पूरा करने के लिए ऐसे अनेक वृहद प्रोजेक्‍ट्स, अनेक वृहद योजनाएं, अनेक वृहद कार्य, जिसमें ऊर्जा चाहिए, गति चाहिए, संकल्‍प शक्ति चाहिए। और उसी का परिणाम है कि करीब-करीब 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से आज इस प्रोजेक्‍ट का पुनरोद्धार का कार्य यहां प्रारंभ हो रहा है।

पूर्णतया हिंदुस्‍तान के लिए यह एक नई प्रौद्योगिकी है। कोयला गैसिफिकेशन के द्वारा यहां के इस काले डायमंड को एक नई प्रौद्योगिकी के द्वारा न सिर्फ इस क्षेत्र को; बल्कि देश को भी नई दिशा मिलने वाली है। देश को बाहर से जो गैस लाना पड़ता है, यूरिया लाना पड़ता है; उससे भी मुक्ति मिलेगी और बचत होगी।

इस क्षेत्र के नौजवानों के लिए ये रोजगार का भी बड़ा अवसर है। करीब साढ़े चार हजार लोग इस प्रोजेक्‍ट के साथ जुड़ेंगे और इसके कारण आस-पास बहुत सी व्‍यवस्‍थाएं विकसित होंगी, जिसका लाभ यहां के लोगों को मिलेगा।

विकास की दिशा कैसे बदली जा सकती है- नीति साफ हो, नीयत देश के लिए समर्पित हो, तब फैसले भी उत्‍तम होते हैं। हमारे देश में नवरत्‍न, महारत्‍न, मिनीरत्‍न- ऐसे कई सरकारी उपक्रमों की चर्चा हम सुनते आए हैं। कभी अच्‍छी खबर, कभी बुरी खबरें आती रहती हैं। लेकिन उनको मिला करके, एक नवशक्ति बन करके कैसे किसी प्रोजेक्‍ट को आगे बढ़ाया जा सकता है, ये एक नया उदाहरण देश के सामने होगा कि जब देश में इस प्रकार के रत्‍न इकट्ठे हो रहे हों, महारत्‍न इकट्ठे हो करके इस प्रोजेक्‍ट की जिम्‍मेदारी लेंगे और उन सबके विशेषज्ञ, उन सबका धन इस काम में लगेगा और उड़ीसा के जीवन को और देश के किसानों की आवश्‍यकताओं को पूर्ण करने का कारक बनेगा।

मुझे बताया गया है, क्‍योंकि मैं ऐसे परियोजनाओं की आधारशिला रखने जाता हूं तो मैं पूछता हूं कि कार्य पूर्ण होने की तिथि बताइए। उन्‍होंने मुझे 36 महीने बताया है। मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, 36 महीने के बाद मैं फिर से यहां आपके बीच आऊंगा और इसका उद्घाटन भी करूंगा। इस विश्‍वास के साथ मैं फिर एक बार मुख्‍यमंत्री जी का हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हुए अपनी वाणी को यहां विराम देता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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