इस्लामपुर के दोनों शिक्षक नहीं चाहते स्कूल में पढ़ाना



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 23 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर स्थित दाड़ीभीट हाईस्कूल में नियुक्त दोनों शिक्षक अब उस स्कूल में काम नहीं करना चाहते हैं। पिछले गुरुवार से ही सरकारी तौर पर दोनों इस स्कूल के शिक्षक हैं। लेकिन स्कूल में हुई हिंसा के बाद दोनों स्कूल में पढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं। नई-नई नौकरी मिलने पर खुश होने वाले उर्दू के शिक्षक सनाउल्ला रहमान और संस्कृत भाषा के शिक्षक तोरांग मल्लिक का कहना है कि अब वहां पढ़ाने का मन नहीं करता। स्कूल की ओर से 2016 में उर्दू और संस्कृत के शिक्षक की मांग की गई थी, इसके मुताबिक डीआई ने शिक्षकों को स्कूल में नियुक्तिपत्र देकर भेजा था।

गुरुवार की सुबह दोनों स्कूल की अपनी नौकरी पर पहुंचे थे। सरकारी नियमानुसार ड्यूटी पर दोनों हाजिर भी हुए थे। लेकिन उनके स्कूल में पहुंचने के बाद स्कूल और आसपास के इलाकों में नियुक्ति को लेकर विरोध शुरू हो गया। उस दिन की घटना को लेकर वे अभी तक दहशत में हैं। उर्दू के अध्यापक सनाउल्ला का कहना है कि उस स्कूल के बारे में मुझे पहले कुछ भी जानकारी नहीं थी। सरकार की ओर से वहां नियुक्ति के लिए पत्र दिया गया था। लेकिन स्कूल पहुंचने पर देखा कि छात्र-छात्राएं मुझे लाठियां दिखा रहे हैं। कुछ लोग थप्पड़ दिखा रहे थे। बहुत अपमानित महसूस कर रहे थे। कभी सोचा ही नहीं था कि नौकरी के पहले दिन ऐसा अनुभव होगा। उनका मानना है कि एक शिक्षा प्रतिष्ठान में आड़ में रहकर बच्चों को उकसाने वालों को सजा मिलनी ही चाहिए। छोटे लड़के जिस तरह से पुलिस वालों पर हमला कर रहे थे, सोचा भी नहीं जा सकता। हम लोग तो स्कूल के भीतर थे, ऐसा लग रहा था कि हम आतंकवादी हैं और फौज ने नाकाबंदी करके चारों ओर से हमलोगों को घेर रखा है। स्कूल को लेकर वहां ऐसा माहौल बन गया था। कोलकाता के रहने वाले सनाउल्ला का कहना है कि वे शिक्षा विभाग से कहेंगे कि हालात को देखते हुए उनकी नियुक्ति किसी और जगह की जाए।

दूसरी ओर, घटना के तीन दिन बाद भी संस्कृत के अध्यापक तोरांग मल्लिक आतंक के साये में दिख रहे हैं। स्कूल में ज्वायन तो कर लिया है लेकिन भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि स्कूल के छात्र ही जब हमें नहीं चाहते, तब वहां कैसे काम कर सकते हैं? कूच बिहार के रहने वाले मल्लिक का कहना है कि परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है, इसके साथ ही ऐसे माहौल में काम करना भी आसान नहीं है। सोच रहे हैं कि शिक्षा विभाग से आवेदन करेंगे कि उनका तबादला किसी दूसरी जगह कर दिया जाए।

मालूम हो कि स्कूल में शिक्षकों की मांग को लेकर हुए हंगामे के दौरान दो लोगों की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि मरने वाले स्कूल के छात्र नहीं थे। परिवार की ओर से घटना की सीबीआई जांच की मांग करते हुए पुलिस पर फायरिंग का आरोप लगाया गया है। लेकिन पुलिस ने फायरिंग से इंकार करते हुए कहा है कि पुलिस ऐसे मामलों में हथियार लेकर नहीं जाती है।

भाजपा की ओर से 26 सितंबर को 12 घंटे बंगाल बंद की अपील की गई है।

माकपा ने बंद से दूर रहने का फैसला किया है तो कांग्रेस का कहना है कि वह न तो विरोध करेगी और न ही समर्थन करेगी।

मुख्यंमत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल में किसी तरह का बंद नहीं होगा। राज्य में हिंसा फैलाने वालों से सख्ती से निबटा जाएगा।

लेकिन एक ओर नौकरी मिलने पर भी शिक्षक खुश नहीं हैं तो दूसरी ओर शिक्षक मिलने पर स्कूल के छात्र-छात्राएं भी नाराज हैं।

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