गंगा नदी के बीच में 2100 साल पुरानी दुर्गा



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 29 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

माना जाता है कि 100 ईसा पूर्व राजस्थान में पहली बार दुर्गापूजा की गई थी। इस सोच के मुताबिक 2100 साल पुरानी दुर्गापूजा का प्राचीन रूप हावड़ा में पूजा के मौके पर पेश किया जा रहा है। गंगा नदी के बीच में पानी की लहरों में राामकृष्णपुर घाट के नजदीक जहाज पर पंडाल बना कर इस बार लोगों को आकर्षित करने की योजना बनाई गई है। रामकृष्ण स्वामीजी विवेकानंद संघ की ओर से जहाज पर करीब 6000 किलोग्राम लोहे की रड से पंडाल बनाया जा रहा है। पूजा कमेटी के आयोजकों का कहना है कि 2100 साल पुरानी दुर्गा की मूर्ति को फाइबर के माध्यम से पेश किया जा रहा है।

यादवपुर विश्वविद्यालय के इलूमिनेशन के साइंस विभाग के अध्यापक की सलाह पर लाइटिंग की जा रही है। इसलिए यहां की पूजा की सजावट सिर्फ आसपास ही नहीं बल्कि हावड़ा ब्रिज, द्वितीय हुगली सेतु, ग्रांड फोरशोर रोड और स्ट्रैंड रोड से भी देखी जा सकेगी। पूजा कमेटी के आयोजकों का दावा है कि इस साल हावड़ा ही नहीं कोलकाता में भी ऐसी पूजा का मुकाबला नहीं दिखाई देगा। प्रचार प्रसार के लिए पूजा कमेटी की ओर से सारे कोलकाता में पोस्टर, बैनर लगाए गए हैं।

पूजा कमेटी के अध्यक्ष सत्यव्रत सामंत का कहना है कि देश के कई संग्रहालय में घूमने के बाद हमें प्राचीन देवी मूर्ति के बारे में पता चला। बताया जाता है कि राजस्थान में माटी खोदने के दौरान देवी की मूर्ति मिली थी। यह मूर्ति फिलहाल संग्रहालय में रखी हुई है। हम लोगों का हाल तक मानना रहा है कि कोलकाता की सबसे पुरानी दुर्गापूजा साबर्न राय चौधरी के परिवार में की गई थी। लेकिन पता चला है कि उनके पहले भी देश में दुर्गापूजा की जाती थी। एक तो पानी के जहाज पर बैठ कर पूजा देख सकेंगे और दूसरे इतनी दूर से किसी भी पूजा की लाइटिंग दिखाई नहीं देगी।

पूजा कमेटी के सूत्रों का कहना है कि कसबा के एक मूर्तिकार ने फाईबर की मूर्ति बनाई है। बताया जा रहा है कि महालया से पहले ही देवी की मूर्ति पंडाल में पहुंच जाएगी। फिलहाल पंडाल की सजावट का काम चल रहा है।

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