---रंजीत लुधयानवी, कोलकाता, 24 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
कई लोगों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में मरीजों की तुलना में सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड नहीं हैं। राज्य में लोगों की शिकायत है कि किस्मत से किसी बड़े सरकारी अस्पताल में भर्ती हो जाने पर तो समस्या रहती है कि क्या उसे बिस्तर मिलेगा और अगर मिलेगा तो कितने लोगों के साथ उसे शेयर करना पड़ेगा। इसका कारण यह है कि सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या सीमित होती है और मरीजों की संख्या असीमित। लेकिन बंगाल में यह सीमित संख्या कम नहीं है बल्कि देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक है। यह खुलासा केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार की ओर से किया गया है। हाल में प्रकाशित केंद्र सरकार की स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण रिपोर्ट नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 में कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या के बारे में पश्चिम बंगाल देश में पहले स्थान पर है।
केंद्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि बंगाल के ग्रामीण और शहरी इलाकों के सरकारी अस्पतालों की संख्या को अगर जोड़ दिया जाए तो यह करीब 80 हजार हैं। कुल मिलाकर यहां 78 हजार 566 बेड सरकारी अस्पतालों में हैं। यह संख्या देश में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, दूसरे कई स्वास्थ्य सूचक में राज्य कर्नाटक, तामिलनाडू जैसे दक्षिण भारत के राज्यों को जोरदार टक्कर दे रहा है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों के मामले में दूसरे स्थान पर तामिलनाडू का स्थान है। वहां 77 हजार 532 बेड हैं। तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश और चौथे स्थान पर कर्नाटक जैसे राज्य हैं।
हालांकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो साल पहले प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या केंद्र की रिपोर्ट के मुकाबले अधिक बताई गई हैं। हेल्थ आन द मार्च 2016 इस बारे में सबसे ताजा सालाना रिपोर्ट के आंकड़े पेश किए गए हैं, जिसमें बताया गया है कि मेडिकल कालेज से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक कुल मिलाकर सरकारी चिकित्सा केंद्रों में बिस्तर की संख्या 83 हजार 859 है।
केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी डाक्टर अजय चक्रवर्ती का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य केंद्रों में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है। बीते कुछ सालों में हम लोगों ने 42 सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल बनाए हैं, जिससे हजारों की संख्या में बिस्तर वृद्धि हुई है। 2015 से 2018 के बीच चालू हुए इन अस्पतालों में 36 में 300-300 और छह में 500 बिस्तर हैं। इस तरह मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के कारण 10 हजार 380 बिस्तर बढ़े हैं।
हालांकि केंद्र और राज्य की रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल स्वास्थ्य के मामले में अव्वल है, लेकिन इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में भर्ती के लिए लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके बाद भी वहां महीनों बाद नंबर आता है। आखिर इसकी वजह क्या है? इस बारे में श्री चक्रवर्ती का कहना है कि राज्य के ज्यादातर लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाते हैं, इसलिए इस तरह की समस्याएं आती हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2017 में सरकारी अस्पतालों के आउटडोर में 12 करोड़ लोगों ने डाक्टर को दिखाया है। अगर इसमें आयुष अस्पतालों के 38 लाख मरीजों को और जोड़ दिया जाए तो साल भर में 12 करोड़ 38 लाख लोग इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के आउटडोर में डाक्टरों को दिखाने के लिए आए थे।
https://www.indiainside.org/post.php?id=4115