---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 16 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अगले महीने राज्य में भाजपा की प्रस्तावित रथयात्रा के लिए उसकी खिंचाई करते हुए इसे एक राजनीतिक नौटंकी करार दिया। उन्होंने लोगों से इसे अनदेखा करने को कहा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि यह रथ यात्रा नहीं बल्कि रावण यात्रा है। यह कोई रथ नहीं, पंचसितारा होटल है। उन्होंने भाजपा पर देश की तमाम प्रमुख संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप भी लगाया है। वे यहां तृणमूल कांग्रेस की एक बैठक में बोल रही थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की रथ यात्रा खत्म होने के बाद राज्य सरकार सड़कों का शुद्धिकरण कर राज्य को साफ करने के लिए उसी रूट पर एक पवित्र यात्रा का आयोजन करेगी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में चल रहे विवाद का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार सीबीआई और रिजर्व बैंक (आरबीआई) जैसे संस्थानों को बर्बाद करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस विध्वंस से देश को बचाने में तृणमूल कांग्रेस अहम भूमिका निभा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार आरबीआई और सीबीआई के कामकाज का तरीका बदलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मूर्तियों के निर्माण को अपना चुनावी एजंडा बनाया है। लेकिन अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के बाद वह खुद ही मूर्ति बन जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस (एनआरसी) को अपडेट करने की कवायद के जरिए भाजपा सिर्फ सांप्रयाकि विभाजन पैदा करने की इच्छुक है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ऐसा कोई प्रयास बर्दाश्त नहीं करेगी। आने वाले दिनों में देश को भाजपा से बचाने में पार्टी अहम भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करने के लिए वे जनवरी में यहां ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अपनी प्रस्तावित रैली में सभी विपक्षी नेताओं को न्योता देंगी। रैली का नारा होगा भाजपा हटाओ, देश बचाओ।
॥■॥ किसानों में सस्ते दर पर सात हजार करोड़ का कर्ज बांटेगी ममता
अगले साल होने वाले चुनावों से पहले राज्य के किसानों को लुभाने के लिए ममता बनर्जी सरकार ने दो फीसद ब्याज पर सात हजार करोड़ रुपए का कृषि ऋण बांटने का फैसला किया है। राज्य के मंत्री अरूप राय ने शुक्रवार को यहां इसकी जानकारी दी। मौजूदा दर चार फीसद है। लेकिन सरकार ने इसे कम करने का फैसला किया है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि कोआपरेटिव बैंकों व सोसायटियों की सहायता से उक्त रकम अगले साल मार्च से पहले बांट दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि सरकार को शिकायतें मिल रही थीं कि किसानों को व्यावसायिक बैंकों से कर्ज नहीं मिल रहा है या फिर इसमें उनको काफी परेशानी हो रही है। उसके बाद ही यह फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि खासकर राज्य के सुदूर इलाकों में रहने वाले किसानों को व्यावसायिक बैंकों से समर्थन नहीं मिल रहा है। इसलिए सरकार ने कृषि ऋण के तौर पर सात हजार करोड़ रुपए बांटने का फैसला किया है। यह रकम अगले साल मार्च से पहले बांट दी जाएगी। श्री राय ने उम्मीद जताई कि इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवनस्था को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बीते साल के 5200 करोड़ के मुकाबले कृषि ऋण की रकम 34 फीसद बढ़ा कर सात हजार करोड़ कर दी है।
राज्य सहकारिता विभाग के सूत्रों ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद राज्य सरकार 710 ग्राम पंचायत इलाकों में बैंकों की शाखाएं नहीं खोल सकी है। इसी वजह से सहकारिता समितियों को बैंकों के तौर पर काम करने की अनुमति दी गई है। राज्य की 2,661 सहकारिता समितियों को बैंक के तौर पर काम करने की अनुमति दी गई है। सरकार की दलील है कि इससे और ज्यादा किसानों को बैंकिंग के दायरे में लाने में सहायता मिलेगी। सूत्रों ने बताया कि सस्ते दर पर कर्ज देने से होने वाले नुकसान का बोझ सरकार उठाएगी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने सहकारिता समितियों व सोसायटियों के जरिए स्व-सहायता समूहों में भी 12 सौ करोड़ रुपए का कर्ज बांटने का फैसला किया है। बीते साल यह रकम एक हजार करोड़ रुपए थी।
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