---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 16 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
प्रदेश भाजपा की ओर से लोकसभा चुनाव के पहले राज्य के बुद्धीजीवियों में पैठ बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हाल तक कामयाबी नहीं मिल सकी है। हाल में चुनाव की रणनीति को तय करने के लिए दल के 18 बुद्धीजीवियों को लेकर आयोजित एक बैठक में प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग की गई। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को हुई बैठक में कलकत्ता हाइकोर्ट के प्रसिद्ध वकील और दल के सदस्य सुप्रदीप राय ने सीधे प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की शैक्षणिक योग्यता, शिक्षित समाज में उनकी इमेज और अभद्र भाषा समेत कई मामलों को लेकर सवाल उठाए। बंद कमरे में हुई बैठक में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग भी की।
बताया जाता है कि हटाने की मांग को सुनकर प्रदेश अध्यक्ष घोष भड़क गए और उन्होंने कहा कि मैं ही अध्यक्ष हूं और रहूंगा। दल में रहना है तो मेरी लाइन पर चलना होगा। इसके विरोध में राय ने कहा कि आप सारी जिंदगी अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते, हो सकता है कि आने वाले दिनों में इस पद पर मैं आसीन हूं। इसके साथ ही उन्होंने 22 नवंबर को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर घोष के खिलाफ शिकायत करने की चेतावनी भी दी।
इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में राय ने पत्रकारों को बताया कि जब तक घोष जैसे लोग बंगाल में भाजपा के नेतृत्व में हैं, दल के विस्तार की संभावना नहीं है। इसका कारण यह है कि बंगाल और बिहार-यूपी में फर्क है। यहां एनकाउंटर कर दूंगा, चूल खींच कर मारूंगा जैसे बयान का उल्टा असर होता है। लारेटो हाउस की छात्रा कोलकाता के प्रसिद्ध डाक्टर की बेटी मेरी पत्नी ने घोष जैसे लोगों के कारण भाजपा से नाता तोड़ने का एलान किया है। मालूम हो कि हाल में दुगार्पुर शहर के उखड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए घोष ने विवादित बयान देते हुए कहा कि हमारी पार्टी जब किसी को मारती है तो वह अस्पताल नहीं सीधे श्मशान पहुंच जाता है। तृणमूल नेता के एक बयान के जवाब में उन्होने यह कहा। तृणमूल के स्थानीय नेता ने कहा था कि दंगा-फसाद के लिए उकसाने वाले बयान देने पर यहां जमकर पिटाई की जाएगी कि 6 महीने तक अस्पताल में रहना होगा। मालूम हो कि दुर्गापुर में भाजपा की ओर से पुलिस-प्रशासन की मंजूरी के बगैर रैली का आयोजन किया गया था, पुलिस और सिवीक वालंटियरों की ओर से घोष, मुकुल राय समेत भाजपा नेताओं को रोकने का प्रयास किया गया तो कई सिवीक वालंटियरों की पिटाई की गई थी।
इसके जवाब में घोष का कहना है कि बंगाल में भद्र पुरूष की राजनीति करने में कोई फायदा नहीं है। पहले भी ऐसे भद्र पुरूष थे, लेकिन हमें सिर्फ 4 फीसद वोट मिलते थे। भाषण देने और राजनीति करने में फर्क है। उन्होंने कहा कि मैने कहा है कि मेरी लाइन पर चलना होगा क्योकि किसी भी दल में अध्यक्ष की बात को मान कर ही चलना पड़ता है।
उक्त बैठक में भाजपा के एक और उपाध्यक्ष चंद्र बसु भी उपस्थित थे। उन्होंने वाद-विवाद को अनुचित करार देते हुए माना कि बंगाल में भाजपा जिस तौर-तरीके से चल रही है, उससे हिंदु मतदाताओं में इसका जनाधार बढ़ने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद होने वाले दूसरे उपचुनाव में यह साफ होता दिख रहा है कि भले ही भाजपा दूसरे स्थान पर रह रही है लेकिन तृणमूल कांग्रेस के साथ उसका फर्क बढ़ता ही जा रहा है।
https://www.indiainside.org/post.php?id=4297