विज्ञान की समझ को आम जनता तक पहुँचाना ही विज्ञान की सफलता है। 25 मार्च को साल्टलेक के कॉलेज मोड़ के करीब इंस्टच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड मैनेजमेंट के सभाकक्ष में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री एस एस आहुलवालिया ने यह बात कही । मंत्री आहुलवालिया आज विज्ञान भारती की पश्चिम बंगाल शाखा विवेकानन्द विज्ञान मिशन के विज्ञान और तकनिकी मेला और प्रदर्शनी के उद्धाटन समारोह में बोल रहे थे। इस त्रिदिवशीय मेला में तकरीबन 50 विद्यालय के 700 छात्रों ने हिस्सा लिया साथ ही कई वैज्ञानिक संस्थानों का सहयोग रहा। इस मौके पर भारतीय परंपरा में वटवृक्ष और पीपल वृक्ष के पूजन की वैज्ञानिक अवधारणा को व्यक्त करते आहुलवालिया ने कहा कि आज आक्सीजन के संकट से बचाव का एक ही उपाय है इन वृक्षों की रक्षा और उनकी छाया का उपयोग जिससे हमारे शरीर में आक्सीजन स्तर ठीक रहे। आहुलवालिया ने कृषि के साथ मत्स्य पालन और पशुपालन खासकर बकरी पालन पर जोर देते हुए बकरी के दूध की रोगोपकारी क्षमता को बताया। इस अवसर पर मुख्यवक्ता रामकृष्ण विवेकानंद विश्वविद्यालय के उपकुलपति स्वामी आत्मप्रियानंद ने कहा कि स्वामी विवेकानंद को धर्म पुरुष के तौर पर देखा जाता है जबकि भारत में विज्ञान और शिक्षा के विकास में स्वामी विवेकानंद का महत्वपूर्ण योगदान है। स्वामी जी ने इस संदर्भ में जमशेद जी टाटा और स्वामी विवेकनंद की मुलाकात एक यात्रा में बताते हुए कहा कि इसी दौर की वार्ता स्वामी जी के भारत के विकास में विज्ञान चिन्तन को स्पष्ट करती है। इस मौके पर राष्ट्रीय आयुर्वैदिक औषधि विकास अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा० जयराम हाजरा, भारतीय सांख्यकी संस्थान के निदेशक विमल राय तथा यूईएम के कुलपति सत्यजीत चक्रवर्ती ने भी विज्ञान के विकास और नयी पीढ़ी की विज्ञान शिक्षा पर वक्तव्य रखा। विवेकानंद विज्ञान मिशन के अध्यक्ष प्रो० पताकी चरण बनर्जी मंच पर मौजूद थे। स्वागत भाषण आईईएम के निदेशक सत्य जीत चक्रवर्ती ने दिया। डा० जजाती नायक ने विज्ञान के छात्र सुलभ कार्यक्रमों के साथ सालाना कार्यों की जानकारी दी। संस्था के महासचिव डा निशिथ कुमार दास ने धन्यवाद जताया।
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डा० आनन्द पाण्डेय
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