मुम्बई। पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी आफ इंडिया (मुंबई चैप्टर) और गोल्डमेन कम्यूनिकेशन्स द्वारा इंडियन कम्यूनिकेशन्स सम्मेलन का आयोजन नेहरु सेंटर में किया गया। दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन माने जाने वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर एवं डॉक्टर राधाक्रृषनन पिल्लई द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पी.आर.एस.आइ (मुंबई चैप्टर) की चेयरपर्सन अल्पना किल्लावाला ने सम्मेलन में उपस्थित सभी अतीथयों को पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया के बारे में अवगत कराया। पी. आर.एस.आइ का मक़सद आज के दौर के बदलते हुए समय, ग्राहक, दर्शक और बाक़ी लोगों को ध्यान में रखते हुए बिज़्नेस प्लेटफ़ोर्म प्रदान करना है। उन्होंने नयी तकनीकियों का वर्णन किया और साथ ही उन्होंने दैनिक जीवन में जनसम्पर्क के महत्व को भी बताया।
वही डॉ. पिल्लइ ने कहा "सौ बात की एक बात या एक बात की सौ बात" "बोलने से पहले करो और करने के बाद बोलो" के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कम्यूनिकेशन हमारी ज़िंदगी का हिस्सा है जो कि सही जगह, सही समय और सही श्रोता तक पहुँचाना आवश्यक है। समारोह को आगे बढ़ाते हुए श्रीमान केतकर ने बताया कि "लोग वही पढ़ते है जो पढ़ना चाहते हैं" । इसके साथ ही उन्होंने माइक्रो आयडेंटिटी पर प्रकाश डाला और कहा "कोई नहीं बोलता है कि हम भारतीय हैं जब तक इंडिया पाकिस्तान का मैच या युद्ध ना हो"। साथ ही उन्होंने पारम्परिक माध्यम के कम होते महत्व का एक कारण सोशल मीडिया को बताया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए पी डब्लू सी की नंदिनी चटर्जी ने डाटा एनालिटिक्स और आर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स के महत्व को समझाया। इसके बाद एच॰डी॰एफ़॰सी॰ बैंक के कॉर्पकॉम के प्रमुख नीरज झा ने बताया कि किस तरह से किसी भी बिज़नेस के आचार विचार को समझना ज़रूरी है। चितरंजन घोष, टी.सी.एस के प्रमुख (कॉर्पकॉम) ने कस्टमर एक्सपिरीयन्स पर ज़ोर दिया। साथ ही शालिनी सिंह, टाटा पावर (कम्यूनिकेशन) ने बताया कैसे हम इनोवेशन को प्रभावशाली विचार के साथ उपयोग कर सकते है।
कार्यक्रम के समापन के दौरान पेप्सिको इंडिया की कॉर्पकॉम प्रमुख गायत्री शर्मा ने मिरिंडा की केस स्टडी से लोगों को रूबरू करवाया। इसके बाद मुंबई यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर दैविता पाटिल ने भारतीय उपभोक्ताओं के सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार के बारे में पक्ष रखा। कार्यक्रम के अंत में पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया जिसमें इंडस्ट्री के दिग्गज पेशेवर वक्ताओं ने संचार के विभिन्न अभियानों की सार्थकता के बारे में बताया।
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