9 अक्टूबर को नई दिल्ली में महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा भागीदार गैर-सरकारी संगठनों के साथ पहले सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन का विषय ‘महिलाओं और बच्चों के लिए नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करना- चुनौतियां और समाधान’ है।
इस सम्मेलन का उद्घाटन महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी द्वारा किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डा• वीरेंद्र कुमार भी सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे। इस एक दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य देश में भागीदार गैर-सरकारी संगठनों को विभिन्न महिला एवं बाल विकास योजनाओं को लागू करने के लिए संवेदनशील बनाना और परस्पर अपने अनुभवों एवं विचारों का आदान-प्रदान करना है। सम्मेलन में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
सम्मेलन में भाग लेने के लिए देश भर से दो सौ पचास गैर-सरकारी संगठनों, संबंधित मंत्रालयों और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।
सम्मेलन में निम्नलिखित मुख्य विषयों पर विचार किया जाएगा
☆ महिलाओं के खिलाफ हिंसा : रोकथाम और न्याय की सुविधा प्रदान करना
☆ महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति : लिंग समानता के लिए मध्यस्थता नीति
☆ महिलाओं और बच्चों के तस्करी : राज्य संस्थाओं की भूमिका
☆ साइबर अपराध और बच्चे : रोकथाम और हानि में कमी करना
☆ किशोर न्याय अधिनियम का कार्यान्वयन : संरचनात्मक चुनौतियां और बच्चों को मुख्य धारा में लाना
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध की रोकथाम और उनका कल्याण सुनिश्चित करना केवल एक संवैधानिक प्रतिबद्धता ही नहीं है बल्कि स्वाभाविक उन्नति और विकास के लिए भी आवश्यक है। महिलाओं और बाल विकास मंत्रालय ने महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के मध्यस्थता स्तर बनाएं हैं और उन्हें सहज न्याय प्रदान करने के लिए विधायी और संस्थागत सहायक तंत्र तैयार किए हैं। इसी तरह मंत्रालय द्वारा बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए भी उपाय किए गए हैं।
महिला और बाल विकास के क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों की सुविधा के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय विभिन्न स्तरों पर कई गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी कर रहा है। इस सम्मेलन के अपेक्षित निष्कर्ष हैं - सेवा वितरण प्रणाली ढांचे में जमीनी स्तर पर विद्यमान समस्याएं और खामियां निश्चित करना, सम्मेलन में रचनात्मक नीति निर्माण और कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए की गई चर्चा के मूल्यांकन के आधार पर उपाय करना और महिला सशक्तिकरण और बाल रक्षा और सुरक्षा की सिफारिशों के लिए इन संगठनों की भागीदारी बढ़ाना।
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