केंद्रीय फसल बीमा योजना से ममता ने किया अलग होने का एलान



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 02 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केंद्रीय फसल बीमा योजना से पश्चिम बंगाल ने अलग होने का एलान किया है। अब राज्य केंद्र की इस योजना का हिस्सा नहीं रहेगा। इस बारे में एलान करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्र की भाजपा सरकार को कुल लागत का महज 20 फीसद हिस्सा देने पर केंद्रीय फसल बीमा योजना का श्रेय लेने का मौका नहीं देगी। राज्य के बीरभूम जिले में एक प्रशासनिक बैठक में उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत महज 20 फीसद प्रीमियम का भुगतान करने के बावजूद इसे केंद्रीय योजना के तौर पर प्रचारित करके एनडीए सरकार इसका सियासी फायदा उठाना चाहती है। लेकिन राज्य सरकार अब से सारी राशि का भुगतान खुद ही करेगी और केंद्र को सियासी फायदा उठाने का मौका प्रदान नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में फिलहाल 49 फीसद लोग फसल बीमा योजना में शामिल हैं। राज्य की ओर से जल्द ही बाकी लोगों को इसमें शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ममता के मुताबिक केंद्र सरकार इस योजना के तहत महज 20 फीसद प्रीमियम का भुगतान करती है और बाकी 80 फीसद प्रीमियम राज्य सरकार देती है। बावजूद इसके केंद्र इसे अपनी योजना के तौर पर प्रचारित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल प्रीमियम के ज्यादातर हिस्से का भुगतान करता है, लेकिन केंद्र इसे अपनी योजना के तौर पर प्रचारित करता रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और आगे से राज्य पूरा भुगतान खुद ही करेगा।

इसके साथ ही उन्होंने राज्य के किसानों को 2-2 लाख रुपए की राशि कृषि कृषक बंधु के बारे में भी जानकारी दी, जिसके तहत 18 साल से लेकर 60 साल तक के किसान की मौत के बाद उनके परिवार वालों को यह रकम प्रदान की जाएगी। ममता ने कहा कि हमारे राज्य में कुल मिलाकर 72 लाख किसान परिवार हैं। यह देश में सबसे ज्यादा है क्योंकि यहां लोगों के पास थोड़ी-थोड़ी जमीन है। हम लोग यह कोशिश कर रहे हैं कि किसान के निधन के बाद 15 दिन के भीतर यह राशि उसके परिवार के लोगों को मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने सभी किसान परिवारों को साल में पांच हजार रुपए की आर्थिक मदद प्रदान करने का दावा भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यह राशि दो फसलों पर 2500-2500 रुपए करके प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हमलोगों ने पहले ही कृषि कर से किसानों को मुक्त कर दिया है और किसानों के लिए म्यूटेशन सिस्टम को समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हालांकि इसके कारण राज्य सरकार पर हजारों करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ रहा है, लेकिन यह हमारे किसानों के लिए बहुत जरुरी है क्योकि वे हमारे राज्य की रीढ़ हैं। सूखा प्रभावित इलाकों के लिए जल धरो-जल भरो योजनाओं समेत कई योजनाएं शुरू करने के बारे में जानकारी देते हुए ममता ने कहा कि खास तौर पर सूखा प्रभावित इलाकों में इस योजना को गंभीरता से लागू करें, जिससे पानी की समस्या का समाधान हो सके।

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