---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 03 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
एक प्राइवेट मोबाइल कंपनी ने कुछ महीनों तक लोगों को मुफ्त कनेक्शन और डाटा की पेशकश की और जल्द ही कंपनी देश के अग्रणी ग्राहकों की कतार में शामिल हो गई। इसी तरह, एक ट्रेन ने कम खर्च में सेवा चालू करके यात्रियों में सफलता हासिल की है। दूसरी ओर, ज्यादा किराए के महंगी एसी ट्रेनों में सीट भरने लायक भी लोग नहीं होते। ज्यादा किराए के कारण ही पहले सिल्वर जेट सर्विस बंद हुई और बाद में एसी दो मंजिला ट्रेन हावड़ा से बंद हो गई। माना जा रहा है कि महंगाई, गरीबी के देश में सफलता हासिल करने के लिए अभी भी लोग कर्म खर्च वाले साधन को पसंद करते हैं।
मालूम हो कि दक्षिण पूर्व रेलवे में चलने वाले ‘अंत्योदय एक्सप्रेस’ के संचालन के अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं। फिलहाल ऐसी तीन ट्रेनें चलती हैं। आम तौर पर इन ट्रेनों को ‘श्रमिक ट्रेन’ के तौर पर पहचाना जाता है। हावड़ा-एर्नाकुलम, सांतरागाछी-चेन्नई और टाटा-मुंबई रूट पर चलने वाली यह ट्रेन लंबी दूरी की सुपरफास्ट ट्रेन तो है। हालांकि इसमें रिजर्व डिब्बे नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में काम की तलाश में गए श्रमिकों या वहां काम के बाद अपने घर लौटने वाले श्रमिकों की पहली पसंद यह ट्रेन बनती जा रही है। आंकड़ों की बात करें तो कहा जा रहा है कि तीन ट्रेनों में एर्नाकुलम सबसे ज्यादा लोकप्रिय ट्रेन साबित हुई है। लगातार बढ़ती जा रही लोकप्रियता को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।
सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि एर्नाकुलम ट्रेन हफ्ते में एक दिन चलती है। ट्रेन हावड़ा से हर शनिवार को रवाना होने के बाद सोमवार को अपने अंतिम स्टेशन पर पहुंचती है। चार मार्च 2017 को ट्रेन का संचालन शुरू किया गया था। पहले दिन से इस साल नवंबर तक की अगर बात करें, तब ट्रेन में कुल मिलाकर एक लाख 40 हजार लोगों ने यातायात किया है। ट्रेन में कुल मिलाकर जितनी सीटें है, उसके मुताबिक एक ट्रेन में 1600 लोग सफर कर सकते हैं। इस तरह महीने में कुल मिलाकर 6400 लोग ट्रेन में सफर कर सकते हैं। लेकिन नवंबर महीने के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ इस महीने के दौरान हावड़ा से ही 11 हजार यात्री ट्रेन में सवार हुए हैं। जबकि अक्टूबर में कुल मिलाकर 9 हजार लोग सवार हुए थे। इसके पहले सितंबर की अगर बात की जाए, तब 17 हजार 192 लोग इस ट्रेन में सवार हुए थे।
ट्रेन की इतनी ज्यादा लोकप्रियता का कारण आखिर क्या है? इस बारे में जोन के एक अधिकारी का कहना है कि विभिन्न राज्यों से कामकाज की तलाश में हजारों श्रमिक केरल की ओर रवाना होते हैं। काम की तलाश में जाने वाले लोगों के लिए यह ट्रेन पहली पसंद बन गई है। सूत्रों ने बताया कि ट्रेन वेल्लोर के नजदीक काटपाड़ी स्टेशन होकर जाती है, जिससे भारी संख्या में इलाज के लिए जाने वाले मरीज और उनके परिवार वाले इस ट्रेन से यातायात करना पसंद करते हैं। बताया जाता है कि चार महीने पहले आरक्षण की व्यवस्था चालू होने के कारण ज्यादातर लोगों को समय पर टिकट नहीं मिलते हैं, ऐसे लोग भी अंत्योदय ट्रेन में सफर करना पसंद करते हैं। इस कारण एर्नाकुलम ही नहीं दूसरी दो ट्रेनें भी लोगों की पसंद बन गई हैं।
ट्रेन से यातायात करने वाले लोगों का भी मानना है कि पहला कारण तो टिकट की कीमत कम होना है। इन दिनों जहां रेलवे की ओर से महंगी से महंगी ट्रेनेंं चलाई जा रही हैं, जिनका किराया आसमान छू रहा होता है। ऐसी ट्रेनों में लोग सफर करने से कतराते हैं। हालांकि टिकट वहां आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। जबकि अनारक्षित अंत्योदय ट्रेन में पहले से आरक्षण की जरुरत नहीं रहती है और जरुरत के मुताबिक लोग ट्रेन में सवार हो सकते हैं। इसके साथ ही ट्रेन की आरामदायक सीटें, सामान रखने की व्यवस्था, एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जाने का रास्ता, मोबाइल चार्जर प्वायंट समेत सभी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं। इसलिए लोगों का मानना है कि अगर रेलवे कम किराए की ऐसी ट्रेनों को दूसरे रूटों में भी चलाए तो लोगों को फायदा पहुंच सकता है और रेलवे की आय में भी वृद्धि ही होगी।
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