विजयवाड़ा, 06 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने कहा है कि छात्रों और युवाओं को नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए और उच्च नैतिकता के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए उन्हें संस्कृति के संरक्षण और प्रकृति की रक्षा करने का प्रयत्न करना होगा। वह शनिवार 05 जनवरी को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के आंध्र लोयोला कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य फादर थेओ माथियास एसजे के जन्म शताब्दी समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
उपराष्ट्रपति ने फादर माथियास के मिशनरी उत्साह और अथक परिश्रम की सराहना की जिसके कारण आंध्र लोयोला कॉलेज अस्तित्व में आया और कहा कि फादर माथियास ने अपनी दृष्टि और अपनी प्रतिबद्धता की गहराई से तेलुगु लोगों के दिल और दिमाग पर विजय प्राप्त की थी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि महान संस्थाएं केवल नियमों पर नहीं बल्कि रीति-रिवाजों, परंपराओं और प्रथाओं पर भी चलती हैं। उन्होंने फादर मथियास द्वारा स्थापित किए गए समय की पाबंदी, अनुशासन, सम्मान और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए प्रशंसा व्यक्त की जो आज तक इस महान संस्थान में फलता-फूलता रहा है।
श्री नायडू ने धन की कमी, योग्य शिक्षकों का अभाव, बुनियादी ढांचे की कमी, गुणवत्ता और क्षमता से संबंधित मुद्दों जैसी उच्च शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा की और कहा कि भारत की शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षा का अधिकार कानून के कार्यान्वयन के बाद भी बहुत कुछ किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का उद्देश्य समावेशी और सतत विकास है और बताया कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए देश के युवाओं को एकजुट होना होगा जो नवोन्मेषी, बुद्धिमान और प्रतिभा सम्पन्न हैं।
श्री नायडू ने कहा कि भारत को जातिगत भेदभाव, हिंसा, कट्टरता और पूर्वाग्रह जैसी घृणित सामाजिक प्रथाओं द्वारा अंधेरे युग में वापस नहीं लाया जाना चाहिए। उन्होंने देश के युवाओं से ऐसी सभी सामाजिक बुराइयों से मुक्त होने तथा नए और प्रगतिशील मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया।
इस बात की पुष्टि करते हुए कि भारत हमेशा से धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता, स्वीकृति और शांति के मूल्यों के साथ जुड़ा रहा है, उपराष्ट्रपति ने युवाओं को प्रेरित किया कि वे हमेशा देश के कालातीत संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमेशा अपनी निष्ठा बनाये रखें। उन्होंने कहा कि अपने संवैधानिक मूल्यों के लिए, मनुष्यों के लिए और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए हमारी प्रतिबद्धता ही सच्चे राष्ट्रवाद और देशभक्ति का सार है।
श्री नायडू ने कहा कि हमें ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ को त्यागने एवं हर भारतीय में अंतर्निहित रूप से विद्यामान प्रतिभा, कौशल और शिल्प कौशल को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम एक बहुत ही जटिल दुनिया में रहते हैं जहां झूठ सच के साथ आसानी से घुल-मिल जाता है। उन्होंने कहा कि बदलता मीडिया परिदृश्य और नए सोशल मीडिया का समावेश सभी को सही निर्णय लेने और समस्याओं के समाधान के लिए सही जवाब खोजना अधिक चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में, ज्ञान, कौशल और क्षमता के अलावा, युवाओं के पास एक मजबूत नैतिक दिक्सूचक (कम्पास) होना चाहिए जो उन्हें नई दुनिया के इन नैतिक दुविधाओं के समाधान में मार्गदर्शन करेगा एवं उनके कैरियर तथा व्यक्तिगत जीवन में आने वाली समस्याओं से निपटने में मदद करेगा।
उन्होंने शैक्षिक संस्थानों में नैतिक विज्ञान को एक अनिवार्य विषय बनाने और युवाओं में पर्यावरणीय निर्वहनीयता को लेकर जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
https://www.indiainside.org/post.php?id=4699