बंगाल में 52 साल बाद दो दिन की हड़ताल



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 07 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

एक जमाना वह भी था जब पश्चिम बंगाल में आए दिन बंद और हड़ताल का आयोजन किया जाता था और वह सफल भी रहती थी। भले ही बंद किसी छोटे दल की ओर से किया जाता था। राज्य में सौ बार से भी ज्यादा बार हड़ताल की जा चुकी है, लेकिन लगातार दो दिन बंद का रिकार्ड विरल है। इतिहास के झरोखे में झांकने पर महज दो ऐसी हड़ताल के बारे में पता चलता है। इसके पहले 52 साल पहले 1966 में दो दिन की हड़ताल की गई थी और तीसरी बार कल से दो दिन की हड़ताल शुरू होने वाली है।

हालांकि 20-21 फरवरी 2013 को भी श्रमिक संगठनों ने दो दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था, लेकिन अंतिम समय राज्य में एक दिन की हड़ताल वापस ले ली गई थी। बंद के दूसरे दिन भाषा दिवस होने के कारण हड़ताल वापस ली गई थी। खाद्य आंदोलन के समर्थन में मार्क्सवादी संगठनों की ओर से 22-23 सितंबर 1966 को दो दिन की हड़ताल बुलाई गई थी। जबकि इसके पहले 23 और 24 जून 1953 को जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी की कश्मीर में रहस्यजनक तरीके से मौत के विरोध में बंद बुलाया गया था।

सरकारी रिकार्ड की जांच करने पर पता चलता है कि स्वतंत्रता के बाद अभी तक पश्चिम बंगाल में 116 बार विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने बंद की अपील की है। हालांकि इसमें देशव्यापी हड़ताल के आंकड़े भी शामिल हैं। दो बार दो दिन की हड़ताल के कारण हड़ताल के दिनों की संख्या 118 हो गई है। हाल तक के रिकार्ड की अगर बात करें, तब मार्क्सवादी दल हड़ताल के मामले में दूसरे दलों से आगे रहे हैं। वाममोर्चा श्रमिक श्रमिक व राजनीतिक लों की ओर से 73 बार हड़ताल की गई है। वामपंथी एसयूसीआइ ने 10 और सीपीआइएमएल ने एक बार हड़ताल की है। कांग्रेस ने 14, तृणमूल कांग्रेस ने 13, भाजपा ने पांच बार हड़ताल की है। हालांकि आजादी के बाद पश्चिम बंगाल में पहली बार 25 फरवरी 1950 को हिंदू महासभा ने तत्कालीन पूर्व पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के विरोध में हड़ताल की थी।

आंकड़ों से पता चलता है कि वाममोर्चा के सत्ता में आने के बाद भी हड़ताल की गई। 1980 के दशक में 12 हड़ताल में 11 वामपंथी और एक कांग्रेस ने की थी। 1990 के दशक में वाममोर्चा ने सात, कांग्रेस ने 10, भाजपा और तृणमूल ने एक -एक बार हड़ताल की। 2000 के पहले 10 साल वाममोर्चा सत्ता में था, तब कुल 34 हड़ताल में 10 वामपंथी, 12 तृणमूल, 9 एसयूसीआइ और कांग्रेस-भाजपा ने एक-एक बार बंद किया।

हालांकि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बंगाल में हड़ताल बुलाने का प्रचलन काफी हद तक कम हो गया है। 2011 और 2014 में कोई भी हड़ताल नहीं हुई। जबकि 2012 में तीन, 2013 और 2018 में दो-दो बार हड़ताल हुई। इसके अलावा 2015, 2016 और 2017 में एक-एक हड़ताल हुई।

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