पीढ़ीयों के बीच विद्वता की अभाव की तुरपाई ....



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
सात वर्षीय गोविंद तिवारी के पितामह दो - दो विषयों से स्नातकोत्तर थे। परन्तु निराला तिवारी के 5 वर्ष की अवस्था में समय से पहले ही इस संसार को छोड़ कर चले गए तब अपने पिता का साया सीर से उठ जाने के कारण पढाई-लिखाई की डगर पकड़ नहींं पाया। सार्वजनिक जीवन के सबसे उपेक्षित और निचले पायदान के गार्ड की नौकरी करते हुए जीवन यापन कर रहे निराला को ज्ञान के अभाव ने ताउम्र डंक मारा। वह अब अपनी संतान गोविंद के सीर पर ज्ञान की चादर ओढाने के लिए अभावों की तुरपाई कर रहा है। जहां महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस जैसे ग्रंथ की रचना की कदाचित अनजाने में भी उसी पथरीले काशी के तुलसीघाट पर निराला रविवार को अपने सात वर्षिय पुत्र गोविंद को दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ याद कराते दिखे। मूल रुप से बिहार के भभुआ निवासी निराला तिवारी बनारस में गार्ड की नौकरी करते रहे है। वह अस्सी क्षेत्र में ही किराये का एक कमरा लेकर रहते है। दो बेटीयों और एक पुत्र के पिता निराला की यह हार्दिक इच्छा है कि मेरा बेटा मेरे पिता की तरह ही विद्वान बने। काशी में संस्कृत विद्यालय में कक्षा 5 में प्रवेश दिलाने के लिए श्लोकों का सस्वर पाठ गोविंद को याद करवा रहे है। निराला का कहना है कि उनके तीनों बच्चे राजकीय मध्य विद्यालय, कठेज, कैमूर भभुआ, बिहार में पढते हैं, छमाही परीक्षा भी चल रही है लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली निःशुल्क पुस्तकों का वितरण नहींं होने के कारण बच्चों की पढाई में बहुत दिक्कतें आ रही है आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहींं है कि वह बच्चों की पाठ्य सामग्री खरीद सके।

यह मोबाइल नंबर 9110099168 निराला तिवारी का है। विभिन्न सामाजिक संघठनों से यह आग्रह है कि निराला का सहयोग करें ताकि वह अपने पुत्र को विद्वान बना सकें।

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