--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
महामना के मानसपुत्र बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट प्रो• विजयनाथ मिश्र लकवा रोग जनजागरुकता पर प्रख्यात न्यूरोलाजिस्ट के परिकल्पना से भारत में निर्मित दुनियां की पहली फिचर फिल्म "फिर वही दिन" यूरोपीय देश जर्मनी में लोकार्पण के लिए प्रोफेसर मिश्र रवाना हुए। गौरतलब है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के न्यूरोलाजी विभाग एवं नवदृष्टि विभूति फाउंडेशन की ओर से ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन लकवा जनजागरण के तहत लकवा रोग के प्रति समाज में फैले भ्रांति को दूर करने के उद्देश्य से "फिर वही दिन" फिल्म का निर्माण किया गया है। लकवा रोग जनजागरुकता पर भारत में निर्मित यह विश्व की पहली फिल्म है। फिल्म की परिकल्पना एवं शोध बीएचयू न्यूरोलाजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो• वी• एन• मिश्र एवं प्रख्यात फिल्म निर्माता नरेन्द्र आचार्य के निर्देशन में फिल्म का फिल्मांकन वाराणसी और आसपास के दर्शनीय एवं ऐतिहासिक स्थलों पर किया गया है। फिल्म का प्रीमियर शो आईपी माल सिगरा, वाराणसी में गांधी जयंती के अवसर पर सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो• बी• एम• शुक्ल के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने शुभकामना देते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के लिए स्वास्थ्य के प्रति जानजागरुकता जरुरी है। इस अवसर पर विधायक रविन्द्र जायसवाल, एमएलसी केदारनाथ सिंह, पूर्व विधायक अजय राय, प्रो• संजय गुप्ता उर्फ खुशहाली गुरु, इनरव्हील क्लब उदया वाराणसी की अध्यक्ष तनू शुक्ला, समाजसेविका शेफाली मिश्रा, सिक्मिम सरकार के चिकित्सा सलाहकार प्रो• सतीश जैन, विकलांग विश्वविद्यालय के कुलपति डा• योगेश दुबे, बीएचयू महिला महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्या प्रो• अन्नपूर्णा शुक्ला, डा• अभिषेक पाठक, कुबेर क्रियेशन वाराणसी के निदेशक अभय शंकर तिवारी उर्फ कुबेर आदि मौजूद रहे। प्रीमियर शो के दौरान पूरा हाल खचाखच भरा हुआ था। लोगों ने कहा कि लकवा रोग की जनजागरुकता के लिए भारत की यह पहली फिचर फिल्म "फिर वही दिन" मील का पत्थर साबित होगी। इसके पूर्व भी ख्यातिलब्ध न्यूरोलाजिस्ट प्रो• वी• एन• मिश्र की परिकल्पना में मिर्गी रोग की जनजागरुकता के लिए "एक नया दिन" फिल्म का निर्माण किया गया था जिसका तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नई दिल्ली में उद्घाटन किया था। मिर्गी रोग जनजागरुकता पर हिंदी / अंग्रेजी भाषा में बनी फिल्म भारत सहित पूरी दुनियां में धुम मचायी थी।
☆ दिमागी लकवा के बारे में कुछ तथ्य : -
● भारत में हो रहे मौतों का तीसरा बड़ा कारण।
● यदि समय रहते लकवा को पहचान कर, चिकित्सक तक पहुँच गए तो 70 प्रतिशत लकवा का इलाज सम्भव है।
● दिमाग के लकवा जब युवा अवस्था में आता है तो घर में कमाने वाला बीमार पड़ जाता है, तमाम दिक़्क़तें पूरे घर भर को घेर लेतीं है।
● व्यक्ति चलने फिरने में परेशान हो जाता है।
● बोली भाषा चले जाने से, व्यक्ति अपनी बात भी नही कर सकता है।
● जो ठीक भी हो जाता है, उसमें वो चलने में 60 से 70 प्रतिशत में बहुत घसीट के चलते है।
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