जम्मू-कश्मीर : प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास



जम्मू-कश्मीर, 03 फरवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● प्रधानमंत्री ने लेह, लद्दाख का दौरा किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेह, जम्मू एवं श्रीनगर की अपनी एक दिवसीय यात्रा के पहले चरण में आज लद्दाख पहुंचे। उन्होंने वहां विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन / शिलान्यास किया।

कंपकंपा देने वाली सर्दी में वहां उपस्थित भीड़ की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा “जो लोग कठिन परिस्थितियों में रहते हैं, वे हर मुश्किल को चुनौती देते हैं। आपका स्नेह मुझे कड़ी मेहनत करते रहने की प्रेरणा देता है।”

उन्होंने लद्दाख विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया और कहा, “युवा छात्र लद्दाख की आबादी के 40% हिस्सा हैं। इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय की लंबे समय से मांग रही है। लद्दाख विश्वविद्यालय के शुभारंभ के साथ, यह मांग पूरी हो जाएगी।” यह विश्वविद्यालय लेह, कारगिल, नुब्रा, ज़ांस्कर, द्रास और ख़ाल्सती के डिग्री महाविद्यालयों से निर्मित एक क्लस्टर विश्वविद्यालय होगा और छात्रों की सुविधा के लिए लेह और कारगिल में प्रशासनिक कार्यालय होंगे।

प्रधानमंत्री ने दातांग गाँव के पास दाह में 9 मेगावाट डीएएच पनबिजली परियोजना और 220 केवी श्रीनगर- अलस्टेंग - द्रास- कारगिल - लेह संचरण प्रणाली का उद्घाटन किया । इन परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने विलंब की संस्कृति को पीछे छोड़ दिया है"। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उनके द्वारा शिलान्यास की गई सभी परियोजनाओं का उनके द्वारा ही उद्घाटन किया जाए।

आज ही लद्दाख में पांच नए पर्यटक और ट्रैकिंग मार्ग भी खोले गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे ही कोई शहर अच्छी तरह से संपर्क से जुड़ जाता है, आर्थिक रूप से भी जीवन आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन पूरी हो जाने के बाद, दिल्ली से लेह की दूरी कम हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने लेह में एक पट्टिका का अनावरण कर कुशोक बकुला रिम्पोछे (केबीआर) हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का शिलान्यास किया। नया टर्मिनल सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ निर्बाध यात्री आवाजाही की सुविधा भी प्रदान करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं का परिणाम बिजली की बेहतर उपलब्धता, बेहतर कनेक्टिविटी के रूप में सामने आयेगा और इस प्रकार फिर से इस क्षेत्र में पर्यटकों की उपस्थिति बढ़ जायेगी। यह कई गांवों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर भी खोलेगा।

इसके अलावा, संरक्षित क्षेत्र परमिट की वैधता 15 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। अब पर्यटक अधिक समय तक लेह की अपनी यात्रा का आनंद ले सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एलएएचडीसी अधिनियम में कुछ बदलाव किए गए हैं और परिषद को व्यय के संबंध में और अधिक अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब स्वायत्त परिषद क्षेत्र के विकास के लिए भेजी गई धनराशि जारी करती है।

प्रधानमंत्री ने अंतरिम बजट के बारे में बताया कि अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए आवंटन में 30% और अनुसूचित जातियों के विकास के लिए लगभग 35% की बढ़ोतरी की गई है।


● प्रधानमंत्री जम्मू में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जम्मू-कश्मीर की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, जम्मू का दौरा किया। उन्होंने राज्य में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए विकास परियोजनाओं की एक श्रृंखला का अनावरण किया। प्रधानमंत्री आज लेह, जम्मू और श्रीनगर के एक दिवसीय दौरे पर रहें।

प्रधानमंत्री ने जम्मू यात्रा के दौरान सांबा के विजयपुर में एम्स की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा कि एम्स की स्थापना से लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिलेगी और इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा पेशागत लोगों की कमी दूर होगी। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर मेडिकल कॉलेजों में जल्द ही 500 और सीटें जोड़ी जाएंगी

प्रधानमंत्री ने आज यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कठुआ का उद्घाटन करते हुए खुशी जताई कि जम्मू के युवाओं को 10% ईडब्ल्यूएस कोटा से लाभ प्राप्त होगा।

उन्होंने जम्मू में भारतीय जन संचार संस्थान के उत्तरी क्षेत्रीय केंद्र परिसर के निर्माण की आधारशिला भी रखी। कैम्पस टीएमएटी जम्मू की स्थापना शैक्षणिक वर्ष 2012-13 में की गई थी और तब से यह एक अस्थायी भवन से काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने जम्मू के किश्तवाड़ में 624 मेगावाट की किरू पनबिजली परियोजना और 850 मेगावॉट रैटल हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा, "क्षेत्र में नई बिजली परियोजनाएं युवाओं को रोजगार प्रदान करेंगी"। प्रधानमंत्री ने सौभाग्य योजना के तहत जम्मू और कश्मीर में परिवारों के 100% विद्युतीकरण की भी घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने कश्मीर घाटी में कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए पारगमन आवास के निर्माण की आधारशिला रखी। उन्होंने घोषणा की कि विस्थापित कश्मीरियों को 3000 पदों पर नियुक्त करने के लिए काम जारी है। उन्होंने कहा, "भारत उन परिस्थितियों को नहीं भूलेगा जिनमें पंडितों को अपना घर छोड़ना पड़ा था।" उन्होंने कहा कि देश को उन लोगों के साथ निश्चित रूप से खड़ा होना चाहिए जिन्हें पड़ोसी देशों द्वारा सताया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के तहत देविका और तवी नदियों के प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से परियोजना की आधारशिला रखी। इस परियोजना का मार्च 2021 तक पूरा होना निर्धारित है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए सीमा पर 14000 बंकर बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 500 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ ओआरओपी के साथ छल करने की कोशिश की थी जबकि हमने 35000 करोड़ रूपये आवंटित किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व शासक सक्रिय रहे होते तो करतारपुर साहिब भारत का हिस्सा होता।

आज की जम्मू की यात्रा का एक और आकर्षण प्रधानमंत्री द्वारा सजवाल में चिनाब नदी पर 1640 मीटर चौड़ाई के दो लेन पुल का शिलान्यास किया जाना था। यह सजवाल और इंद्री पट्टियन की आबादी के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा जिससे दोनों स्थानों के बीच यात्रा की दूरी 47 किलोमीटर से घटकर 5 किलोमीटर तक आ जाएगी। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि जम्मू-कश्मीर में संपर्क को बेहतर बनाने के लिए 40,000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।


● प्रधानमंत्री ने 220 केवी श्रीनगर- अलस्टेंग - द्रास- कारगिल - लेह ट्रांसमिशन लाइन राष्ट्र को समर्पित किया; लद्दाख अब नेशनल ग्रिड से जुड़ गया है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 220 केवी श्रीनगर - अलस्टेंग - द्रास- कारगिल – लेह ट्रांसमीशन सिस्टम को आज राष्ट्र को समर्पित किया। इस कदम से पूरे वर्ष के दौरान लद्दाख को गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे पर्यटन क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा और लद्दाख के सामाजिक-आर्थिक विकास में वृद्धि होगी।

प्रधानमंत्री ने 12 अगस्त, 2014 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी और 4.5 वर्षों के भीतर, यह परियोजना भारत सरकार की एक नवरत्न कंपनी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) द्वारा पूरी कर ली गई है। प्रधानमंत्री ने इस परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा, "हमने विलंब की संस्कृति को पीछे छोड़ दिया है"।

2266 करोड़ रूपये की इस परियोजना के परिणामस्वरूप सर्दियों के दौरान डीजल पैदा करने वाले सेटों के उपयोग में बड़े पैमाने पर कमी आएगी और इस प्रकार प्राचीन लद्दाख क्षेत्र के सुंदर पर्यावरण की सुरक्षा में मदद मिलेगी।

• श्रीनगर - अलस्टेंग - द्रास- कारगिल - लेह ट्रांसमिशन लाइन के बारे में:

लगभग 3000-4000 मीटर की ऊंचाई पर निर्मित, लगभग 335 किमी लंबी इस ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण पावरग्रिड द्वारा किया गया है। इस परियोजना में द्रास, कारगिल, खलस्ती और लेह में निर्मित चार नए अत्याधुनिक 220/66 केवी गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन हर वक्त 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। वित्त पोषण प्रावधान 95:05 (भारत सरकार के 95% और 5% जम्मू और कश्मीर राज्य के हिस्से) के अनुपात में हैं।

• क्षेत्र के लिए लाभ:

इस परियोजना के कार्यान्वयन का उद्देश्य लद्दाख में कठोर सर्दियों में लद्दाख के लोगों को बिजली की आपूर्ति करना और ग्रीष्मकाल में एनएचपीसी के कारगिल और लेह हाइडल स्टेशनों की अधिशेष बिजली की निकासी करना था। यह पीएमआरपी योजना के तहत भारत सरकार की एक प्रमुख परियोजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़कर जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार करना था।

यह न केवल ग्रीष्मकाल में बिजली निकासी करने में मदद करेगा, बल्कि इस क्षेत्र में सर्दियों में, जब तापमान में गिरावट और हाइड्रो बिजली उत्पादन समरूप नही रहते हैं, बिजली की आपूर्ति करेगा। यह परियोजना किफायती दरों पर लद्दाख क्षेत्र की बिजली की मांग पूरा करेगी।

उचित दरों पर बिजली उपलब्ध होने से लद्दाख के आतिथ्य उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि डीजल सेटों पर उनकी निर्भरता कम हो जाएगी। यह सभी मौसमों में किफायती प्रवास की तलाश कर रहे पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा।

• निष्पादन में चुनौतियां:

अप्रत्याशित मौसम की स्थिति में पावरग्रिड द्वारा निष्पादित इस दुस्साध्य कार्य को त्रुटिहीन परियोजना निगरानी कौशल, उच्च टीम भावना और रणनीतिक योजना और आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग द्वारा संभव बनाया गया था। द्रास में न्यूनतम तापमान -40 डिग्री तक नीचे जाने के साथ लाइन लगभग छह महीने तक बर्फ से ढकी रहती है। इसलिए, विशेष रूप से डिजाइन किए गए टॉवर नींव का निर्माण टॉवर नींवों को खोलने के लिए हिमपात और हिमस्खलन अध्ययन प्रतिष्ठान (एसएएसई) की सहायता से किया गया था, क्योंकि श्रम बल के समक्ष कम ऑक्सीजन स्तरों पर काम करने की चुनौती थी। यह क्षेत्र में रक्षा प्रतिष्ठानों सहित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लद्दाख क्षेत्र को ग्रिड कनेक्टिविटी और विश्वसनीय गुणवत्ता की बिजली आपूर्ति भी प्रदान करेगा।

इस अवसर पर जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ• जितेंद्र सिंह, जम्मू एवं कश्मीर के विधान परिषद के अध्यक्ष हाजी अनायत अली, भारत सरकार के सचिव (बिजली) ए• के• भल्ला, पावरग्रिड के सीएमडी रवि पी• सिंह, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, राज्य सरकार और पावरग्रिड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

• पावरग्रिड के बारे में:

पावरग्रिड दुनिया की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसमिशन यूटिलिटी में से एक है और इसका 238 सब-स्टेशन और 351,106 एमवीए की परिवर्तन क्षमता के साथ 150,874 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों का एक विस्तृत नेटवर्क है।

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