तस्करी में घरेलू महिलाओं की संख्या में वृद्धि



कोलकाता। देश के विभिन्न राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में तस्करी कोई नई बात नहीं है लेकिन पुरुषों पर सुरक्षा बलों की सख्ती के बाद भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती इलाकों में आरोप है कि कई घरेलू महिलाओं को तस्करी के काम में शामिल किया गया है। बताया जाता है कि पहले कुछ गिनी-चुनी महिलाएं ही इस काम में शामिल थी लेकिन अब इनकी संख्या में खासी वृद्धि हो गई है। इस काम में काफी फायदे के मद्देनजर महिलाओं की संख्या में वृद्धि हो रही है।

खुफिया विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोना और विदेशी करेंसी के मामले में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं और कई महिलाओं ने तो इस काम के लिए पासपोर्ट भी बनवा लिया है। पिछले पांच महीने के दौरान तस्करी के मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है जिसमें दो घरेलू महिलाएं हैं।

पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के पांच राज्यों से भारत-बांग्लादेश की कुल मिलाकर 4096.7 किलोमीटर की सीमा लगी हुई है। बताया जाता है कि सीमा से सटे करीब एक हजार किलोमीटर इलाके में कंटीले बाड़ नहीं लगे हुए हैं। इस खुली सीमा के रास्ते पशुओं, सोना, नशीले पदार्थों, जाली नोट, विदेशी मुद्रा की तस्करी होती है। हजारों लोग तस्करी के काम में शामिल हैं।

खुफिया विभाग के मुताबिक पहले पुरुषों को सीमा पार करने के लिए नियुक्त किया जाता था लेकिन ऐसे तस्करों की गिरफ्तारी के बाद महिलाओं को काम में लगाया जा रहा है। महिलाएं आसानी से माल लेकर जा सकती हैं, दूसरी ओर महिला कांस्टेबल नहीं होने के कारण सीमा पर जांच में भी समस्या होती है।

बीएसएफ के आांकड़ों से पता चलता है कि 4 जून को 25 लाख रुपए के विदेशी नोट के साथ पेट्रोपोल सीमा से एक बांग्लादेशी गृहवधू को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 27 अगस्त को पेट्रोपोल सीमा से ही भारतीय गृहवधू सरस्वती पाल को पकड़ा गया। उसके पास से दो लाख जाली नोट बरामद किए गए थे। चार अक्तूबर को 60 लाख रुपए का सोना लेकर आने के मामले में एक गृहवधू को गिरफ्तार किया गया।

सुरक्षा अधिकारियों की ओर से तस्करी के मामले में महिलाओं को शामिल किए जाने की जानकारी मिलने के बाद सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध महिलाओं पर खास नजर रखी जा रही है। महिलाओं के लिए काम जोखिम भरा नहीं है, नोट या सोना किसी तरह छुपा कर सिर्फ सीमा पार करना है। इस काम के लिए उन्हें अच्छी खासी रकम मिल जाती है। माना जा रहा है कि इसलिए ही घरेलू महिलाओं की तस्करी में सूची बढ़ती जा रही है।

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