---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 27 मार्च 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममनता बनर्जी ने आगामी लोकसभा चुनावों के बाद विपक्षी गठजोड़ के सत्ता में आने की स्थिति में नोटबंदी की जांच कराने और योजना आयोग को पुनर्जीवित करने का वादा किया है। बुधवार को यहां पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा कि सौ दिनों के काम योजना को दो सौ दिनों का किया जाएगा और इसके तहत मिलने वाली मजदूरी भी बढ़ा कर दोगुनी कर दी जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि विपक्षी गठजोड़ की सरकार बनने की स्थिति में हम नोटबंदी के फैसले की जांच करेंगे और योजना आयोग को भी पुनर्जीवित करेंगे। उन्होंने कहा कि नीति आयोग किसी काम का नहीं है। ममता ने कहा कि सरकार मौजूदा गुड्स एंड सेल्स टैक्स यानी जीएसटी की भी समीक्षा करेगी। अगर इससे आम लोगों को सचमुच फायदा हो रहा है तो इसे जारी रखा जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजंसियां उनका फोन टैप कर रही हैं और उनकी बातचीत और एसएमएस की निगरानी की जा रही है। भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया है। आडवाणी से मेरी फोन पर बात हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैं भी चौकीदार अभियान पर व्यंग्य करते हुए तृणमूल प्रमुख ने कहा कि असली चौकीदारों के प्रति तो उनके मन में भारी सम्मान है लेकिन राजनीतिक चौकीदारों के प्रति नहीं।
उन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पूर्व महानिदेशक के• के• शर्मा की पश्चिम बंगाल व झारखंड के लिए विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। ममता ने सवाल किया कि आखिर एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी नौकरी में तैनात पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति का मामला कैसे देख सकता है? उन्होंने कहा कि महानिदेशक रहते शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं और वह भी अपनी वर्दी में।
॥●॥ पीएम किसान को मंजूरी तो कृषक बंधू को क्यों नहीं : तृणमूल
तृणमूल कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार की ओर से किसानों को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर चुनाव आयोग ने चुनाव आचार संहिता के कारण रोक लगा दी है। जबकि ऐसी ही केंद्र सरकार की परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से मांग की गई है कि मामले पर दोबारा विचार किया जाए। तृणमूल का कहना है कि अगर चुनाव आचार संहिता पश्चिम बंगाल की परियोजना पर लागू होती है तो ऐसी ही दूसरी परियोजना पर भी लागू होनी चाहिए। राज्य के कृषि मंत्री आशीष बनर्जी का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री किसान योजना को मंजूरी दी जा सकती है तो कृषक बंधू परियोजना को भी मंजूरी मिलनी चाहिए। चुनाव आयोग को इस बारे में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिसंबर 2018 को किसानों को आर्थिक मदद प्रदान करने के लिए कृषक बंधू योजना की शुरुआत की थी। जबकि इसी तरह की एक परियोजना केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) के नाम से 1 फरवरी को घोषित की गई थी। दोनों परियोजनाएं 2017 के तेलंगाना परियोजना की तरह ही हैं, जिसमें किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद प्रदान की जाती है।
सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल से पहले ओडिसा सरकार की ओर से भी शिकायत की गई थी कि उनकी किसानों को मदद दी जानी वाले परियोजना को रोक दिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सवाल उठाया गया है कि अगर एक एजेंसी की ओर से वही काम किया जाता है और उसे मंजूरी प्रदान की जाती है। जब वैसी ही परियोजना के बारे में दूसरी एजेंसी पर सवाल कैसे उठाए जा सकते हैं? पश्चिम बंगाल के कृषि और दूसरे मामलों के सलाहकार प्रदीप मजूमदार का कहना है कि यह पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण है। पश्चिम बंगाल और ओडिसा के किसानों को यह समझ में आ रहा है कि किस तरह उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है, जबकि इस काम की कोई वजह नहीं है।
इसके साथ ही मजूमदार ने दावा किया है कि राज्य सरकार की ओर से चुनाव आयोग से निवेदन किया गया था कि पश्चिम बंगाल में कृषक बंधू परियोजना को चालू रखने की मंजूरी प्रदान की जाए, लेकिन राज्य सरकार को कोई जवाब नहीं मिला। इस तरह अगर यह परियोजना 26 फरवरी से चल रही है तब इसे जारी रखने की मंजूरी दिए जाने की हम लोगों ने मांग की है। चुनाव आयोग की ओर से जब चुनावआचार संहिता 12 मार्च को लागू की गई, इसके पहले कृषक बंधू परियोजना के कारण राज्य के 26 लाख से ज्यादा किसानों का पंजीकरण हो चुका था। बताया जाता है कि अभी तक 10 लाख लोगों को 151 करोड़ रुपए की राशि आबंटित की जा चुकी है।
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