---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 05 अप्रैल 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
पश्चिम बंगाल के जंगल महल इलाकों से केंद्रीय सुरक्षा बल नहीं हटाने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ठुकरा दिया है। सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर जंगल महल से 29 कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बल हटा दिए गए हैं। इस तरह अब माओवादी प्रभावित इलाकों में कोई भी केंद्रीय सुरक्षा बल नहीं है। बताया जाता है कि वे पहले चरण के तहत कूचबिहार और अलीपुरदुआर के बूथ की पहरेदारी करेंगे। इसके अलावा रूट मार्च के लिए राज्य में पहुंची 10 कंपनियों को भी पहले चरण के मतदान के लिए भेजा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि आयोग के निर्देश पर मुख्यमंत्री ने भारी नाराजगी प्रकट की है। जंगल महल से केंद्रीय सुरक्षा बल की सारी कंपनियों को हटाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था। राज्य सचिवालय की ओर से इसका विरोध किया गया था। मुख्यमंत्री ने खुलेआम गृह मंत्रालय के निर्देश पर विरोध जताया था। राज्य पुलिस के डीजी वीरेंद्र ने राज्य सरकार के विचार को चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक विवेक दूबे तक पहुंचा दिया था।
इस बीच, गृह मंत्रालय से जंगलमहल के हालात जानने के लिए चुनाव आयोग ने वहां के हालात के बारे में जानकारी मांगी। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जंगलमहल शांत है और हाल में वहां हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की सभी कंपनियों को आयोग ने वहां से हटाने का फैसला किया। इस बारे में राज्य पुलिस व कोलकाता चुनाव आयोग के विभाग को सूचित किया गया है।
गौरतलब है कि पहले चरण के तहत देश के दूसरे हिस्सों में भी मतदान होने वाला है, इसलिए मांग के मुताबिक आयोग केंद्रीय सुरक्षा बल भेजने में समर्थ नहीं है। इसलिए राज्य में मौजूद केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों को चुनाव के कामकाज में लगाना चाहता है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि दूसरे चरण की समाप्ति के बाद ज्यादा संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल की कंपनियां यहां आ जाएंगी। हाल तक की सूचना से पता चला है कि पहले चरण में लगभग 60 फीसद बूथों पर राज्य पुलिस निगरानी करेगी, जबकि 40 फीसद बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान रहेंगे।
सूत्रों का कहना है कि पहले चरण के मतदान में 40-42 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान रहेंगे। जंगलमहल से 29 कंपनी सीआरपीएफ, चुनाव के लिए दूसरे राज्य से आने वालरी 10 कंपनी बीएसएफ की भेजी गई है। कहा जा रहा है कि और भी कंपनियां यहां आ सकती हैं। मालूम हो कि राज्य में काफी दिन तक 35 कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बल की कंपनियां थी। कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद कंपनी सीआरपीएफ वहां भेजी गई। दार्जिलिंग में 8 जून 2017 से हुए हंगामे के दौरान तीन कंपनी सीआरपीएफ वहां तैनात की गई थी। वह कंपनियां अब भी वहां हैं, इसके अलावा कोलकाता के सीबीआइ दफ्तर की पहरेदारी के अलावा कई जगह सीआरपीएफ तैनात है। चुनाव में ज्यादा से ज्यादा केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान तैनात करने के लिए ऐसे कर्मचारियों को चुनाव वाले इलाके में भेजा जा सकता है।
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