दीपावली के मौके पर रंग बिरंगे रंगों से सजाए जा रहे हैं घर



--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

दीपावली में महानगर कोलकाता हो, हावड़ा या राज्य का कोई और शहर और उसके आसपास का वातावरण कुछ अन्य राज्यों से अलग होता है। यहां जगमग दीपावली तो माँ काली की पूजा को लेकर भव्य पंडालों का निर्माण होता है। इन पूजा पंडालों को भी विभिन्न कमेटियों और प्रशासन द्वारा पुरस्कृत किया जाता है। घरों व प्रतिष्ठानों में दीपावली की तैयारियाँ शुरू हो गयीं हैं। लोगों ने अपने-अपने आवास को अच्छे व आकर्षक रंगों से सजाना-संवारना शुरू कर दिया है। उनका घर कहीं फीका न रह जाए, इसके लिए वह महंगे व ब्रांडेड कलर का उपयोग कर रहे है। ऐसे में अब पुरानी व बदहाल दिखने वाली दीवारें कलर करने के बाद नए लुक में दिखना शुरू हो गयी है। दीपावली से ठीक पहले लोगों का पूरा जोर घर की सजावट और रगाई, पुताई, पेंटिंग पर है। इन दिनों घर के अंदरुनी सजावट पर सबसे ज्यादा जोड़ है। कोई इस बात की कसर नहीं छोड़ना चाहता है कि वह अपने पड़ोसी से किसी बात पर कम दिखे। इसका असर पेंट मार्केट में दिख रहा है। एक पेंट विक्रेता   का कहना है कि मार्केट में आने वाले अधिकतर लोगों का आकर्षक दिखने वाले रगों पर ज्यादा फोकस है। डिस्टेम्पर और आॅयल ब्रांड पेंट के चाहने वालों की संख्या कम हुई है। प्लास्टिक पेंट की ओर अधिक रुझान देखा जा रहा है। इन रंगों की खासियत और खूबसूरती लोगों को लुभा रही है। जो इसका खर्च नहीं उठा पाते वो चाहते है कि कम से कम घर के गेस्ट रूम में इसकी पेंटिंग जरूर हो जाए। इसकी खासियत है कि दीवार पर किसी भी तरह का दाग लग जाए, उसे पानी से धोकर या कपड़े से रगड़कर साफ किया जा सकता है। घरों व प्रतिष्ठानों में दीपावली की तैयारियाँ शुरू हो गयीं हैं।

आधुनिक युग में इन दिनों रंगों के चयन के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है। संयोग ही है कि एक कंपनी के औसतन खर्च में उपलब्ध इंटरनेट का इन दिनों युवाओं के साथ महिलाएं भी जमकर इस्तेमाल कर रही है। किसी दौर में रगाई-पुताई के लिए गिने-चुने ही कलर हुआ करते थे, लेकिन अब रगों की भरमार है। बाजार में इन दिनों विभिन्न कम्पनियों के कलर भारी संख्या में मौजूद है। सामने इतने सारे कलर देखकर तो ग्राहक भी कन्फ्यूज हो जाए, इसलिए कम्पनी की साइट्स पर ये सारे कलर उपलब्ध है। ज्यादातर ग्राहक भी इन दिनों इंटरनेट से ही अपना कलर पसन्द कर दुकान पर पहुंच रहे है।

हालांकि इस वर्ष 10 से 15 फीसदी महँगाई बढ़ गई है। जीएसटी लगने के बाद इन दिनों रगों के दामों में एमआरपी बढ़ने पर पिछले वर्ष की अपेक्षा इस दफा 30 से 35 फीसदी महगाई बताई जा रही है। रगों के दामों से लेकर डिस्टेम्पर, इमलशन, प्लास्टिक पेंट सभी प्रकार के कलर में महगाई देखी जा रही है। इस महगाई के बावजूद भी लोग अपने घर-दुकान सजाने-संवारने में संकोच नहीं कर रहे है। उनका कहना है कि साल में एक बार घर को संवारने को मौका मिलता है, यदि उसमें भी कंजूसी की जाए, तो कहाँ की बात है। जिसके चलते वह मंहगे व आकर्षक कलरों का चयन कर अपने घरों को आकर्षक बनाने में जुटे हुए है।

इस त्योहारी मौसम में पेण्ट्स की कीमतों में तो उछाल आया ही है, साथ ही पुताई वाले भी इस बार अपनी मजदूरी का ट्रेंड बदल रहे है। पहले के मुकाबले अब वे  मजदूरी दीवारों की फीट के हिसाब से ले रहे है। कोई विशेष पुताई कराने या खास तकनीकि पर पुतइया महंगा रेट वसूल रहे है। वहीं रोजाना के आधार पर पोतने वाले मजदूर एक दिन की 350 से 400 रुपए तक वसूल रहे हैं। जबकि पिछले वर्ष यही मजदूरी 200-250 रुपए थी।

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