बंगाल में अब मुकुल फेक्टर ...!



--- प्रकाश पाण्डेय, कोलकाता।

तृणमूल के निलम्बित सांसद कुणाल घोष ने अब मुकुल राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि मुकुल द्वारा शारदा चिटफंड घोटाले की जांच प्रभावित की जा रही है और वे तथ्यों को छिपा कर केवल गोल - गोल बातें कर रहे हैं। मुकुल राय के सांसद और पार्टी पद से इस्तीफा दिए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि मुकुल केवल स्वयं को प्रभावशाली होने के आरोप से बचने के लिए ऐसा किए। वहीं कुणाल ने मुकुल को चुनौती दी और कहा कि सीबीआई उन्हें मेरे सामने बैठाकर पूछताछ करे।

निलम्बित तृणमूल सांसद कुणाल घोष का यह विस्फोटक आरोप आगामी दिनों में राज्य की सियासत में भूचाल लाने के लिए काफी है। इतना ही नहीं कुणाल ने मांग की कि सीबीआई मुकुल को गिरफ्तार कर पूछताछ करे, क्योंकि तब वे अखिल भारतीय तृणमूल महासचिव थे। शारदा-नारदा मामले में पार्टी के 12 - 13 नेता लिप्त है और यह कतई नहीं माना जा सकता है कि मुकुल को इसकी जानकारी नहीं होगी। आगे कुणाल की माने तो मुकुल राय जो कि पूर्व रेल मंत्री रहे चुके हैं, बंगाल की सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं। मुकुल पार्टी व सांसद पद यह कह कर छोडे़ की तृणमूल में परिवारतंत्र हावी है जो कि एक भ्रामक आरोप है वो असल सच्चाई से सबका ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

इसके इतर कुणाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत भी लिखा और उन्होंने सवाल किया कि आईपीएस मिर्जा द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सीबीआई उन्हें गिरफ्तार कर क्यों नहीं पूछताछ करती ? कुणाल ने अलकेमिस्ट मामले में भी मुकुल पर निशाना साधा।

मीडिया से बातचीत में कुणाल ने बताया कि उन्होंने पीएम मोदी, अरुण जेटली और भाजपा के बंगाल प्रभारी विजयवर्गीय को खत लिखा है जिसमें मुकुल मामले की जांच की मांग की है और उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि जांच से बचने के लिए ही वो सियासी शरण ले सकते हैं।

तृणमूल में परिवारतंत्र के मुकुल के आरोप पर कुणाल ने कहा कि आमतौर पर जिस पेशे में पिता होते हैं, बच्चे भी वैसे ही होने की कोशिश करते हैं, पर मुकुल ने तृणमूल में परिवारतंत्र की बात की है। क्या वे इसका जवाब देंगे कि कांचरापाड़ा में शुभ्रांशु से बेहतर विधायक बनने की योग्यता वाले लोग नहीं थे ? शुभ्रांशु राय युवा तृणमूल के कार्यकारी उपाध्यक्ष भी थे, यह मुकुल के पार्टी में सेकेंड नेता होने के बिना संभव था ? क्या यह परिवारतंत्र नहीं है ? कुणाल ने सवाल किया कि मुकुल के साथ भाजपा नेता, अधीर चौधरी या दूसरे नेता मंच साझा कर सकेंगे ?

पार्टी व सांसद पद से इस्तीफे के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि मुकुल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बड़ा विस्फोट करेंगे लेकिन उन्होंने तो दीदी को पाक साफ करार देकर भाजपा व दूसरी सियासी पार्टियों को धक्का पहुंचाया है और अटकलों के बाज़ार पर विराम चिह्न लगा दिया है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ही नहीं सभी भाजपा के छोटे-बड़े नेता शारदा चिटफंड घोटाला और नारद स्टिंग आपरेशन मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। कहा जा रहा था कि ममता के सबसे ज्यादा करीबी रहे, तृणमूल में नंबर दो माने जाते मुकुल उनके खिलाफ ऐसी-ऐसी जानकारियां देंगे जिससे उन्हें सत्तारूढ़ दल पर हल्ला बोलने में आसानी रहेगी। लेकिन सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद जहर उगलने के बजाए मुख्यमंत्री को आर्थिक घोटालोें में क्लीन चिट दे दी जिससे राज्य भाजपा के नेताओं में हताशा जैसे हालात है।

मीडिया द्वारा मुकुल राय से यह पूछे जाने पर कि क्या आप नहीं मानते कि शारदा-नारद जैसे मामलों की जानकारी ममता को रही होगी ?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को इन मामलों की कोई जानकारी नहीं थी। तृणमूल कांग्रेस के जिन नेताओं के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें मुकुल ने उनका व्यक्तिगत मामला बताया। वहीं इस पूरे मामले में अब भाजपा नेता भी सम्भल कर बोल रहे हैं। राज्य भाजपा अध्यक्ष व विधायक दिलीप घोष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई मामले की जांच कर रही है। उलटा सवाल पूछते हुए उन्होंने कहा कि एक विचाराधीन मामले में मुकुल राय कैसे टिप्पणी कर सकते हैं ? वहीं माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य और लोकसभा सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा का दोहरा चरित्र अब सबके सामने है। ये वही पार्टी है जो भाग मुकुल भाग का नारा देती थी लेकिन आज 'आ जा मुकुल आ जा' कर रही है। अब समझ आ रहा है कि सारा कुछ मिली भगत थी। हालांकि साथ ही उन्होंने कहा कि मुकुल ने तृणमूल में रहते हुए जो गलत काम किए हैं, उसके लिए उन्हें राज्य के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।

मुकुल राय के तृणमूल कांग्रेस के सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद तृणमूल सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। इसके तहत पार्टी को सांगठनिक स्तर पर नए सिरे से मजबूत करने की नीति बनाई गई है। मुकुल ने दावा किया है कि राज्य के 77 हजार बूथो पर उनकी पकड़ है। अभी सीधे भाजपा में जाने की बात मुकुल ने नहीं कही है, लेकिन जिस तरह उन्होंने प्रशंसा की है उससे साफ है कि वह भाजपा के हित में काम करेंगे और तृणमूल को नुकसान पहुंचाएंगे। जिसको गंभीरता से लेते हुए ममता ने तृणमूल को किसी तरह की क्षति नहीं होने देने की नीति बनानी शुरू कर दी हैं। मुकुल ने दुर्गापूजा के बाद सांसद पद से इस्तीफा देने का पहले ही संकेत दिया था। इसे ध्यान में रखते हुए तृणमूल कोर कमेटी की बैठक तय की गई। पहले कोर कमेटी की बैठक मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित निवास पर ही होती थी लेकिन इस बार तृणमूल कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक नजरूल मंच में बुलाई गई। ममता ने ग्राम पंचायत के सदस्य से लेकर पार्षद और विधायक तथा मंत्री से लेकर सांसद तक सभी को बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था।

पंचायत चुनाव में ग्राम बांग्ला पर कब्जा बरकरार रखने के लिए ममता अभी से ही तैयारी शुरू करने का निर्देश पहले दे चुकी हैं। अगले साल के शुरू में ही राज्य में पंचायत चुनाव होगा जिसमें भाजपा भी सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। पंचायत चुनाव में भाजपा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मुकुल की मदद ले सकती है। यह ममता के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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