--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।
13 अक्टूबर। उत्तर बंगाल के दार्जीलिंग में पुलिस और बिमल गुरुंग समर्थकों के बीच हुई झड़प में एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) की मौत हो गई और कई अन्य पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं। दार्जीलिंग में पुलिस ने गैरकानूनी रूप से चल रहे हथियार बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। इसके बाद से ही पुलिस से झड़प शुरू हो गई है। इस मुठभेड़ में एसआई अमिताभ मलिक की मौत हो गई।
दार्जीलिंग की पहाड़ियों के जंगल में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के सुप्रीमो बिमल गुरुंग के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प में एक उपनिरीक्षक समेत कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। इस झड़प में एक एसआई शहीद हो गए। पुलिस ने बताया कि यह मुठभेड़ सुबह पांच बजे उस समय शुरू हुई जब पुलिस के एक खोजी दल ने पातलेबास क्षेत्र के निकट जंगल के भीतर एक ठिकाने पर छापा मारा। यह ठिकाना गुरुंग समर्थकों का गढ़ माना जाता है। गुरुंग के इस इलाके में छिपे होने की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई की। जीजेएम नेता के समर्थकों ने पुलिस पर गोलियां भी चलाई।
मालूम हो कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत अगस्त में गुरुंग पर मामला दर्ज हुआ था। उन पर दार्जीलिंग और आस-पास के क्षेत्रों में हुई बम विस्फोट की घटनाओं में शामिल होने का आरोप भी है।
ध्यान रहे कि बीते कुछ महीने से अगल गोरखालैंड प्रदेश की मांग को लेकर जीजेएम कार्यकर्ता लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों को रोकने के लिए कई बार आंसू गैस के गोले दागे। अलग गोरखालैंड की मांग बहुत दिनों से चल रही है। अब गोरखालैंड की मांग को लेकर अवॉर्ड वापसी भी शुरू हो गई। कर्मा योंजान ने 2016 में सरकार द्वारा दिया गया अवॉर्ड वापस करने का एलान किया। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2016 में सरकार ने मुझे अवॉर्ड दिया था, जो मैं अब वापस कर रह हूं। मुझे अवॉर्ड नहीं चाहिए, बल्कि गोरखालैंड चाहिए।
पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) प्रमुख बिमल गुरुंग के पूर्वोत्तर में सक्रिय माओवादी और कुछ अन्य उग्रवादी संगठनों के साथ संबंध है। पुलिस का कहना है कि गुरुंग ने इन संगठनों से हथियार खरीदते हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अनुज शर्मा ने कहा कि पुलिस के पास गुरुंग के माओवादियों और विद्रोही समूहों के साथ संबंध की जानकारी है। शर्मा ने कहा कि गुरुंग ने इन्हीं संगठनों से हथियार खरीदा है।
उन्होंने बताया कि दार्जीलिंग के निकट उनके समर्थकों द्वारा पुलिस दल पर हमला किया गया, जहां से छह एके-47 राइफलें बरामद हुई है। इसके अलावा यहां से एक नौ एमएम पिस्तौल, पांच सौ राउंड गोला बारूद और बम बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने गुरुंग समर्थकों के पास से भारी मात्रा में आग्नेयास्त्र बरामद किया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को यह जानकारी मिली थी कि गुरुंग पड़ोसी राज्य सिक्किम में छिपे हुए हैं और शुक्रवार को वे दार्जीलिंग हिल्स में प्रवेश करने की कोशिश करने वाले थे। जब पुलिस ने इसके लिए छापेमारी की तभी गुरुंग समर्थकों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। शर्मा ने कहा कि फिर से दार्जीलिंग में अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हम इसे कतई कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें बेशक पुलिस के जवानों की बलिदान ही क्यों न देनी पड़े। मालूम हो कि इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गुरुंग पर आतंकी हमले का आरोप लगाया था।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से निष्कासित और दार्जीलिंग के बोर्ड आफ एडमिनीस्ट्रेटर्स (बीओए) के अध्यक्ष बिनय तमांग ने पहाड़ में हुई हिंसा के लिए दल के प्रमुख बिमल गुरूंग को जिम्मेवार बताते हुए कहा कि इलाके के लोग दार्जिलिंग को कश्मीर नहीं बनने देंगे।
मालूम हो कि मोर्चा समर्थकों के साथ हुई हिंसा के दौरान एक सब इंस्पेक्टर की मौत हो गई और चार पुलिस वाले घायल हुए हैं। राज्य सरकार की ओर से केस दर्ज किए जाने के बाद से ही अगस्त महीने से गुरूंग फरार है। इस बीच मोर्चा का एक गुट गुरूंग का समर्थन कर रहा है, तो दूसरा गुट तमांग के साथ राज्य सरकार के साथ है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोलकाता मुलाकात करने आए तमांग ने कहा कि लंबे समय तक पहाड़ में चले बंद के बाद हालात स्वाभाविक हो रहे हैं और इलाके के लोग खुश हैं। वे इलाके में शांति और स्थिरता चाहते हैं लेकिन गुरूंग और उनके साथी इलाके में शांति नहीं होने देना चाहते। आज की घटना के लिए गुरूंग पूरी तरह से जिम्मेवार हैं।
पुलिस की ओर से दावा किया गया है कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि गुरूंग अपने गढ़ पातालबास में छुपा हुआ है। इसके साथ ही पुलिस ने आरोप लगाया है कि गूरूंग के माओवादियों से भी संबंध हैं।
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