बी.गार्डेन, खतरे में विरल प्रजाति का नारियल का पेड़



रिपोर्ट- वरिष्ठ पत्रकार उमेश तिवारी

• 125 वर्ष पुराना है यह पेड़
• हिन्द महासागर के सेशेल्स द्वीप से लाया गया था
• एक नारियल का वजन 25 किलो है

हावड़ा, दक्षिण हावड़ा स्थित आचार्य जगदीश चन्द्र बोस बोटानिकल गार्डेन में विरल प्रजाति के नारियल का पेड़ खतरे में है। जोड़ा नारियल पेड़ के नाम से मशहूर इस पेड़ को देखने के लिए दूर-दूर से लोग इस गार्डेन में पहुंचते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार 125 वर्ष पूर्व हिन्द महासागर के सेशेल्स द्वीप से इसके कई पौधों को आचार्य जगदीश चन्द्र बोस बोटानिकल गार्डेन में लाया गया था। पृथ्वी के वृहत्तम बीज फल के रूप में इस जोड़ा नारियल को जाना जाता है। इसके एक फल का वजन 25 किलो के लगभग है। इस पेड़ को पूर्ण रूप से विकसित होने में 100 वर्ष लगता है। इसके बाद इसमें फल होने में 7-8 वर्ष लग जाता है। बी. गार्डेन के इतिहास के अनुसार सेशेल्स द्वीप से कई नारियल के पौधे लाए गए थे लेकिन 1 पौधा बचाया जा सका था। इसे गार्डेन के तत्कालीन सुपर जार्ज किंग ने लगाया था। 1998 में पता चला था कि यह पेड़ स्त्री जाति का है, उस वक्त इसमें फूल लग गए थे। इसमें फल लगने के लिए पुरुष पेड़ की पराग की जरूरत थी। तब श्रीलंका से पहली बार 2006 में पराग लाकर संयोग कराया गया। इसके बावजूद इसमें फल नहीं लगा था। तब तत्कालीन सुपर हिमाद्री शेखर देवनाथ ने थाइलैंड से उन्नत किस्म के पराग का इस पेड़ से संयोग कराया गया तब जाकर इसमें नारियल का फल लगा। गार्डेन के अधिकारियों को आशा है कि इसका यह बीज इसके वंश को बढ़ाएगा।

खतरे में है यह पेड़, बी. गार्डेन के वर्तमान सुपर अरविंद प्रमाणिक का कहना है कि इस पेड़ के पत्ते अब सूखने लगे हैं। पत्ते सूखने से हम सब चिंतित हैं। गार्डेन के विज्ञानी और विशेषज्ञ पेड़ की सेवा सुश्रुषा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सौ वर्ष पहले पाम हाउस में बने लोहे की बाड़ से इसका सम्पर्क हो जाने से इस पर गलत प्रभाव पड़ा है। इसके कई भाग में कीटाणु लग गए हैं। बी.गार्डेन के वैज्ञानिक इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं। आशा है कि जल्द ही यह पेड़ स्वस्थ हो जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो 1000 वर्ष तक यह पेड़ जीवित रह सकता है।

पिछले वर्ष बारिश के मौसम में इसे घेरने वाले लोहे के बाड़े में बिजली गिर गई थी। हालांकि इससे पेड़ को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।

2006 से पराग संयोग से लेकर अब तक पेड़ों की देखभाल करनेवाले विज्ञानी सैयद शाहमुल हामिद ने कहा कि जोड़ा नारियल पेड़ को बचाने के लिए केरल के कसारगढ़ स्थित सेंट्रल पाम ग्रुप रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ बातचीत चल रही है। उनके जवाब का इंतजार है। आशा है उनके विज्ञानी हमारे साथ मिलकर इस विरल प्रजाति के पेड़ को बचाने की कोशिश करेंगे।

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