--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
☆ वाराणसी में आयोजित स्वदेशी मेला में हुआ 3 करोड़ का कारोबार
भारत को आर्थिक रुप से मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी से बड़ा शस्त्र कोई नहीं है। स्वदेशी वस्तुएं भाषा और जीवनशैली हमें ऊर्जा प्रदान करती हैं। भारत की आर्थिक राहों पर चलने के लिए सुगम रास्ता दिखाती है। यह बात मंगलवार को वाराणसी के चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकूल में आयोजित दस दिवसीय स्वदेशी मेला के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि भदोही के सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त ने कही।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर ही देश से गरीबी को मिटाया जा सकता है। डाक्टर खेरों ने कहा कि भारत के लिए दुर्भाग्य का क्षण है कि आज भारत का बाजार चीन के सामान से भरा पड़ा है। ऐसे में यह स्वदेशी मेला सबके हृदय में अपने देश की बनी वस्तुओं के खरीदने का संकल्प कराता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश स्वदेशी जागरण मंच के प्रदेश संगठन मंत्री अजय कुमार ने कहा कि चीन जो आसुरी शक्ति ने ऐसा मुंह खोला है कि प्रति माह 130 करोड़ भारतीय, हजारों करोड़ों रुपये का सामान खरीद कर चीन को शक्तिशाली बना रहे हैं। दुर्भाग्य से भारत कमजोर हो रहा है। ऐसे क्षण में आज देश के सभी नागरिकों को संकल्प लेने की जरूरत है। धनतेरस के दिन प्रत्येक भारतीय अपने देश की बनी हुई सामानों को खरीदेंगे और दीपावली के दिन अपने घरों में स्वदेशी दीया जलाएंगे व भारतीय कुंभकारों द्वारा बनी हुई मूर्ति लगाएंगे। भारतीय मूर्तिकारों के द्वारा ही बनी हो जिससे गरीबों के घर में और भारतीय कामगारों के घर में भी दीये जले। गौरतलब है कि इस दस दिवसीय शिल्प मेला में कुल 3 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
कार्यक्रम का सफल संचालन स्वदेशी मेला के संयोजक सुरेश सिंह एवं धन्यवाद डा• अवनिन्द्र कुमार राय ने दिया। इस अवसर पर प्रोफेसर संजय शर्मा, डॉक्टर सर्वेश पांडेय, कन्हैयालाल भारती, आलोक शुक्ला, सत्येंद्र सिंह, सुक्खुराम और डॉक्टर अवनीन्द्र कुमार राय आदि मौजूद रहें।
https://www.indiainside.org/post.php?id=585