--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
☆ केयर 4 एयर ने जारी किया प्रदूषण रिपोर्ट, काशी बनी प्रदूषण की गठरी
वाराणसी : इसको जीएसटी का असर कहे या असर नोटबंदी का कहे या आर्थिक तंगी कहे इस दीवाली पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में पटाखों की गूंज कम सुनाई दी है। अपेक्षाकृत सादगी से मनी इस दिवाली ने शहर की आबोहवा को थोड़ी राहत दी है। एक ओर जहां पिछले वर्ष शहर की आबोहवा में दिवाली के दौरान घुलने वाले पार्टिकुलेट कण अनुमान्य मानकों की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक थे, वहीं इस साल दिवाली की अगली सुबह हवा में मौजूद प्रदूषण के कण अनुमान्य मानकों की तुलना में अधिकतम 10 गुना तक पहुँचे। दिवाली की अगली सुबह केयर 4 एयर अभियान की ओर से शहर के कूल 17 जगहों पर वायु प्रदूषण का स्तर मापा गया। इस बाबत आंकड़ो की जानकारी देते हुए मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि कुल 17 जगहों पर पटाखों से उत्पन्न प्रदूषण की जांच की गयी। इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से पी एम् 10 और पी एम् 2.5 कण को मापा गया। दिवाली की अगली सुबह 21 अक्टूबर को इन सभी जगहों पर मशीने लगा कर यह प्रक्रिया की गयी। आंकड़ों को इकट्ठा करने के बाद यह पाया गया कि नई सड़क सबसे ज्यादा और काशी रेलवे स्टेशन सबसे कम प्रदूषित रहा। नई सड़क पर पी एम् 10 की मात्रा 338 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पायी गयी जबकि पी एम् 2.5 की मात्रा 253 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी प्रदूषण सूचकांक के अनुसार प्रदूषण के इन कणों की हवा में अधिकतम अनुमान्य मात्रा 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए।
एकता शेखर ने बताया कि नई सड़क के बाद मैदागिन दूसरे पायदान पर रहा, जहां पी एम् 10 और पी एम् 2.5 क्रमशः 253 और 171 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा। इस सूची में तीसरे पायदान पर आशापुर रहा जहां जहां पी एम् 10 और पी एम् 2.5 क्रमशः 255 और 168 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाया गया। मछोदरी, चौक, महमूरगंज और पांडेयपुर इलाकों में प्रदूषण के कणों का दबाव लगभग एक जैसा रहा।
इन आंकड़ों को पिछले साल की तुलना में देखने पर ऐसा जरूर लगता है कि दिवाली के दौरान पटाखों से उपजने वाला प्रदूषण काफी कम हुआ है। इस बार प्रदूषण का स्तर कम होने के बावजूद भी, अनुमन्य मानकों की तुलना में यह 10 गुना है। ऐसे में अस्थमा, हार्ट अटैक, श्वांस संबंधी अन्य बिमारियों, एलर्जी आदि के मरीजों के साथ साथ छोटे बच्चों और बूढ़े लोगों के स्वास्थ्य पर अत्यंत घातक असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदूषण का स्तर 10 गुणा के बराबर होना यह साबित करता है कि बनारस प्रदूषण की गठरी बन चुका है। इस शहर में दिवाली के दौरान पैदा होने वाला प्रदूषण तात्कालिक कारणों से होता है जबकि बाकी समय में कूड़ा जलाने से लेकर डीजल आधारित परिवहन व्यवस्था कोढ़ में खाज का काम करती है।
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