मजदूर दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम “वी द वुमेन”



प्राचीन युग से ही हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान रहा है। हमारे पौराणिक ग्रंथों में नारी को पूज्यनीय एवं देवीतुल्य माना गया है। हमारी धारणा रही है कि देव शक्तियाँ वहीं पर निवास करती हैं जहाँ पर समस्त नारी जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। प्राचीन ग्रंथों का उक्त कथन आज भी उतनी ही महत्ता रखता है जितनी कि इसकी महत्ता प्राचीन काल में थी। कोई भी परिवार, समाज अथवा राष्ट्र तब तक सच्चे अर्थों में प्रगति की ओर अग्रसर नहीं हो सकता जब तक वह नारी के प्रति भेदभाव, निरादर अथवा हीनभाव का त्याग नहीं करता है।
मजदूर दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम “वी द वुमेन” का आयोजन कोलकाता के न्यूटाउन स्थित नोवोटेल होटल में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ज़ेफायर इवेंट्स व कॉल इवेंट्स मीडिया सहित ढुलाईवाला द्वारा किया गया। विशेषकर महिलाओं द्वारा समर्पित परिश्रम किसी भी क्षेत्र में हो, चाहे पारिवारिक अथवा व्यावसायिक, उसे लोगों तक पहुँचाना, समझाना व सत्य को सामने लाना के मूल आधारों पर ही कार्यक्रम की नीव राखी गयी थी। पुरुष प्रधान समाज मानसिकता के साथ आधी आबादी का नारा दे कर महिलाओं का स्थान श्रेष्ठ मान लेने से सब कुछ सही नहीं हो जाता। सत्य का सम्मान करना होता है, उसे सच्चे मन से स्वीकारना होता है। उदाहरण के तौर पर अपने माताओं, बहनों, पत्नियों व बेटियों का आपके प्रति निःस्वार्थ समर्पित परिश्रम को ही देख लीजिए। महिलाओं का समर्पित परिश्रम पुरुषों की तुलना में बहुत ज्यादा है। आज महिलाओं ने व्यवसाय, नौकरी व राजनीति के क्षेत्र में अपना परचम लहराया हैं। इस गति को निरंतर जारी रखना है। बंगाल राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बेहतर उदाहरण और क्या दिया जाए।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अतिथियों में ऋचा शर्मा (मिस इंडिया इंटरनेशनल), देबाशीष सेन (हीडको, सीईओ), विधान नगर क्षेत्र से विधायक सुजीत बॉस, टौलीवूड में निर्देशक ऋतोब्रोतो भट्टाचार्य उपस्थित थे। वही ऋचा शर्मा (मिस इंडिया इंटरनेशनल) ने अपने वक्तव्यों में उनके पिता द्वारा उनको सिखाए गए उपदेशों को सभी के समक्ष सम्मानपूर्वक रखा।
बतौर मुख्य अतिथि 89 वर्षीय वृद्ध महिला शीला घोष को आमंत्रित किया गया था जो कोलकाता के एजेसी बॉस रोड स्थित हल्दीरामस के बाहर एक्साइड के करीब खाद्य सामाग्री बेच कर अपना गुजारा करती हैं। चार दीवारों के भीतर बैठी महिलाओं के लिए ये प्रेरणाश्रोत हैं।

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