---मुकेश सेठ,
सचिव - इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स।
• राज्यपाल कोशियारी ने फडणवीस के साथ एनसीपी नेता अजित पवार को दिलाई डिप्टी सीएम पद की शपथ
• फडणवीस, पवार ने कहा स्थिर सरकार के लिए उठाया क़दम
• मुम्बई में शिवसेना काँग्रेस एनसीपी की बैठक में उद्धव के नेतृत्व में सरकार बनने की हो चुकी थी डील फाइनल किन्तु अल सुबह बीजेपी ने किया सबको भौचक्का
• उद्धव के मुख्यमंत्री बनने का सपना किया चकनाचूर तो पीएम ने फडणवीस अजित पवार को ट्वीट कर दी बधाई
• शरद पवार ने किया ट्वीट अजित के साथ मैं नहीं
• शिवसेना न घर की रही न घाट कीमहाराष्ट्र में एक बार फिर फडणवीस सरकार
महाराष्ट्र की राजनीति ने आज अल सुबह पूरी तरह से यू टर्न ले ली, कल रात तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उद्धव ठाकरे के बैठने की बात कांग्रेस, एनसीपी के साथ शिवसेना भी भी तय बता उनके नेतृत्व में जल्द ही सरकार बनाने के दावे किए जा रहे थे कि बीजेपी ने क्रिकेट के खेल की ओवर की अंतिम गेंद पर छक्का मार विरोधियों को हतप्रभ कर मैच विजेता बनती दिख रही है।
राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने आज सुबह देवेन्द्र फडणवीस को मुख्यमंत्री व एनसीपी के दिग्गज नेता व शरद पवार के भतीजे अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाकर नयी सरकार बनाने व बहुमत साबित करने को कहा है।
फडणवीस व पवार को शपथ दिलाते ही राज्य में राष्ट्रपति शासन ख़त्म हो गया है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र को खिचड़ी सरकार से बचाने के लिए इस सरकार का गठन किया जा रहा है तो वहीं उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा मैंने महाराष्ट्र में स्थिर सरकार के लिए ये कदम उठाया है तो वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ट्वीट कर अजित के इस क़दम से अपने को अलग किया है।
मालूम हो कि कल से ही दिल्ली से काँग्रेस के बड़े रणनीतिकार सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल, महाराष्ट्र के प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे, के सी वेणुगोपाल मुम्बई आये हैं तो प्रदेश के बड़े नेता भी एनसीपी प्रमुख शरद पवार व उनकी पार्टी के बड़े नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत के बाद शिवसेना एनसीपी काँग्रेस की सरकार का खाका तैयार किया था।
शुक्रवार की रात तक उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने की बात तय होने के साथ शिवसेना एनसीपी काँग्रेस की सरकार में कितने मन्त्रीपद मिलेंगे व कौन विधानसभा अध्यक्ष होगा ये सारी कवायद तीनों दलों के नेताओं ने तय कर लिया था।
उधर राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने भी शनिवार को दिल्ली जाने का तय कार्यक्रम स्थगित करके ये संकेत दे दिया था कि शनिवार का दिन महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर वाला दिन होगा।
फडणवीस व एनसीपी दिग्गज अजित पवार के एक साथ आने से ये साफ़ हो गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह से दो दिनों पूर्व हुई एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मीटिंग बड़े उलटफेर के लिए थी। हालाँकि शरद पवार ने इस मीटिंग को महाराष्ट्र के किसानों के मुद्दे पर हुई बताए थे जिस पर काँग्रेस ने टाईमिंग को लेकर ऐतराज जताया था तो शिवसेना ने कहा था कि मोदी सबके प्रधानमंत्री है व पवार किसानों की समस्याओं को लेकर मिले थे शिवसेना भी मिलेगी।
फडणवीस के साथ अजित पवार के द्वारा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ट्वीट कर कहा कि ये उनका निजी फैसला है एनसीपी से इससे लेना देना नही है।
कहने में गुरेज़ नहीं कि जिस तरह से शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर महाराष्ट्र में चुनाव लड़ते हुए 56 सीट जीतकर आयी थी व जनादेश ने बहुमत दिया उसके बाद नाटकीय तौर पर शिवसेना ने आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने व सत्ता में 50-50 कई भागीदारी की मांग करते हुए बीजेपी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अमित शाह समेत तमाम नेताओं पर हमले करने के साथ ही 30 साल पुराने गठबंधन को तोड़ते हुए एनसीपी काँग्रेस के साथ गलबहियाँ कर ली।
एनसीपी काँग्रेस से समर्थन पाने व किसी भी कीमत पर अपना मुख्यमंत्री बनवाने के लिए शिवसेना ने बीजेपी को धोखेबाज बताते हुए केंद्र सरकार में अपने एकलौते मन्त्री अरविंद सावंत से भी इस्तीफ़ा दिलवा दिया।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव से पूर्व सपरिवार व पार्टी के सभी सांसदों के साथ अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करके एक तरह से ये दिखाने की कोशिश की थी कि हम ही है हिंदुत्व के बड़े लम्बरदार, बीजेपी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अमित शाह अभी तक दर्शन करने नही आये जबकि श्री राम मंदिर मुद्दे के नाम पर वोट लेते आये है।
अब जबसे शिवसेना सीएम के लिए एनसीपी कांग्रेस के दरवाजे दरवाज़े जाने लगी तबसे अपने को बड़ा सेक्युलर साबित करने के लिए हिन्दुत्व के मुद्दे को परे धकेल दी।
उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव परिणाम के दिन 24 अक्टूबर को ही घोषणा कर दिए थे कि एक महीने बाद 24 नवम्बर को सभी विधायकों के साथ रामलला के दर्शन करने जाएंगे किन्तु उन्होंने कुछ दिन पहले ही अयोध्या जाने के कार्यक्रम को रद्द कर रामलला से परहेज़ करना शुरू कर दिया जिससे काँग्रेस एनसीपी समर्थन देने में नाराज़ न हो।
वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने को लेकर काँग्रेस का विरोध सर्वविदित है तो वहीं बीजेपी के साथ रहते हुए इसकी जमकर पैरवी करने वाली शिवसेना ने अब इस मुद्दे पर भी होठ सी लिए हैं।
जिस तरह की सत्ता के लिए एनसीपी काँग्रेस ने विरोधी विचारधारा वाली पार्टी शिवसेना को समर्थन देकर मौका परस्त राजनीति करके सरकार बनाने में लगी हुई थी ठीक वही काम अब बीजेपी ने भी किया है भले ही उसने काँग्रेस एनसीपी से गठबंधन न किया हो किन्तु उसने भी जैसे को तैसा वाली कुर्सी की राजनीति करते हुए एनसीपी के दिग्गज नेता अजित पवार को अपने साथ कर फडणवीस सरकार बनवाने के लिए क़दम बढ़ा दिए हैं।
महाराष्ट्र में इतना निश्चित है कि बीजेपी की फडणवीस सरकार को समर्थन देने के लिए एनसीपी ही नही बल्कि शिवसेना व कांग्रेस के तमाम विधायक भी अपने पाले बदलने से नही चूकेंगे।
कुल मिलाकर शरद पवार ने एक बार फ़िर ये तय साबित कर ही दिया है कि क्यों उनको महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश का सबसे चतुर राजनेता माना जाता है, पवार ने अंतिम दम तक शिवसेना को उलझाए रखा तो कांग्रेस को भी सेक्युलर होने का ग़ुरूर कम करवा दिया, शिवसेना के साथ गलबहियाँ करवा कर तो कट्टर हिंदुत्व की झंडाबरदार शिवसेना को भी हिंदुत्व के मुद्दे पर सीएम की कुर्सी पर बिठाने के ख़्वाब दिखवाकर हिंदुत्व, श्री राम मंदिर, वीर सावरकर से दूर करवा दिया जिसके चलते शिवसेना रटने लगी थी कि वह पहले से ही सेक्युलर पार्टी है।
फ़िलहाल आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति अब बीजेपी बनाम एनसीपी होने जा रही हैं शिवसेना व काँग्रेस अब तीसरे व चौथे नम्बर पर जाती दिख रहीं हैं।
उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फडणवीस व अजित पवार को बधाई देते हुए ट्वीट किया कि फडणवीस व अजित पवार की पार्टी महाराष्ट्र के हित में काम करेगी।
मालूम हो कि महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सदस्य चुने जाते हैं जिनमे 105 बीजेपी, 56 शिवसेना, 54 एनसीपी, 44 काँग्रेस समेत कुछ छोटी पार्टियों के विधायक जीत कर आये हैं।
24 अक्टूबर से चुनाव परिणाम आने के बाद राज्यपाल ने बीजेपी, शिवसेना व एनसीपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था किंतु तीनो दलों ने बहुमत के आंकड़े राज्यपाल को दे नहीं पाए जिसके चलते राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश केंद्र से कर दी थी।
जिसके चलते कुछ दिनों तक महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा रहा इस दौरान राज्यपाल ने महाराष्ट्र के किसानों को बारिश बाढ़ से हुए नुकसान के लिए हजारों करोड़ की धनराशि मदद हेतु देने की घोषणा की थी।
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