---अंशू आंचल,
अम्बेडकरनगर-उत्तरप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
नागरिकता संशोधन बिल सांविधानिक प्रकिया के तहत पास हुई है। फिर विरोध का औचित्य क्या और क्यो...??? और विरोध भी छात्रों द्वारा।
क्या छात्रों का अपनी पढ़ाई से ध्यान हटा कर इस तरह के विवादों पर प्रोटेस्ट करना उचित है। मानती हूं कि देश के हर नागरिकों का कर्तव्य है कि वे देश के विकास में सक्रिय रूप से भागीदारी दें।
पर हम सबको देश के गणमान्य नागरिकों को ये सोचना होगा कि हम किस तरह के मैटर्स को मुद्दा बनायें। किस तरह के मैटर्स पर बोले? किस तरह के मैटर्स पर प्रोटेस्ट करें। और यह ध्यान में रखते हुए प्रोटेस्ट करें कि देश की शान्ति व्यवस्था को नुक़सान न हो। देश का आर्थिक नुकसान न हो।
अक्सर गुस्साई भीड़ देश में दंगे करके देश का आर्थिक नुकसान करती हुई देखी जाती है। कभी बसों में आग लगाती है तो कभी अन्य सामाजिक वस्तुओं को नष्ट कर अपना रोष दिखाती है। आखिर इसका खामियाजा भोगता कौन है कष्ट उठाता कौन है हम आप आम इन्सान। क्यूंकि इसका इस्तेमाल तो हम आम इन्सान ही करते हैं। फिर भी हम इसे नष्ट करने में पीछे नहीं रहते।
राजनीतिक पार्टियों द्वारा राजनीतिक फायदों के लिए जुलूस निकालना आम बात है। पर छात्रों को अपने उज्जवल भविष्य के लिए तत्पर होकर अपने कार्य में संलग्न होने की ज्यादा जरूरत है न कि किसी भी तरह की राजनीतिक प्रदूषण में सम्मिलित होने की।
चलिए मान लेते हैं कि छात्रों को राजनीतिक मामलों में सक्रियता दिखानी है, हस्तक्षेप करना ही है उन्हें उन विषयों पर उन मुद्दों पर बोलना चाहिए जिससे कि देश का उनका सर्वांगीण विकास हो। वो भी यह तय करते हुए कि उनके प्रोटेस्ट की सीमा क्या होगी।
मैं यह पूछना चाहूंगी उन सभी छात्रों से जो कि इस बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं कि इस बिल में ऐसा गलत क्या है..?
सभी छात्रों से आग्रह है कि राजनीतिक पार्टियों के झांसे में न आकर तर्क पर आधारित कार्य करते हुए तर्कपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।
हम सबको, हमारे देश को जरुरत है ऐसे युवा की ऐसे छात्रों की जो कि जो अपनी उर्जा से अपना, देश के सम्पूर्ण समाज का सही विकास कर सकें।
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