ममता को मानद डाक्टरेट : विपक्ष नाखुश... नाराज...



कोलकाता, 27 अक्टूबर। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को समाजसेवा में उनके कथित खास योगदान के लिए मानद डाक्टरेट (डी•लिट) से सम्मानित करने के फैसले के लिए विपक्ष ने कलकत्ता विश्वविद्यालय को आड़े हाथों लेते हुए इसे स्वामिभक्ति का फूहड़ प्रदर्शन और चमचागिरी करार दिया है। इससे पहले विश्वविद्यालय की ओर से दो पूर्व मुख्यमंत्रियों विधान चंद्र राय और ज्योति बसु को मानद उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है।

महानगर के जादवपुर विश्वविद्यालय ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को मरणोपरांत डी•लिट की उपाधि से सम्मानित किया था।

ध्यान रहे कि कलकत्ता विश्वविद्यालय की सीनेट और संचालन समिति (सिंडीकेट) ने बुधवार को आम राय से ममता को डी•लिट की मानद उपाधि से सम्मानित करने का फैसला किया था। मुख्यमंत्री ने भी इस पर सहमति जता दी है।

अगले साल 11 जनवरी को महानगर के नजरुल मंच में आयोजित दीक्षांत समारोह में उनको इस उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। सिंडीकेट के सदस्य सुबीरेश भट्टाचार्य की ओर से बैठक में पेश उक्त प्रस्ताव का तमाम सदस्यों ने आम राय से समर्थन किया। वाममोर्चा के शासनकाल में जादवपुर विवि की संचालन समिति में माकपा के वरिष्ठ नेता व तत्कालीन भूमि सुधार मंत्री विनय कृष्ण चौधरी को भी मानद उपाधि से सम्मानित करने का प्रस्ताव पेश किया गया था। लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली थी।

दिलचस्प बात यह है कि कलकत्ता विवि के दीक्षांत समारोह में खुद ममता मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगी। सूत्रों ने बताया कि उनको सम्मानित करने के मकसद से ही अबकी विवि परिसर की बजाय नजरुल मंच में दीक्षांत समारोह के आयोजन का फैसला किया गया था।

विपक्ष ने इस फैसले के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ ही ममता व उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया है। वेस्ट बंगाल कालेज एंड यूनिवर्सिटी टीचर्य एसोसिएशन ने विवि के फैसले पर हैरत जताई है। कलकत्ता विवि के एक शिक्षक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि ज्योति बसु को जब मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कानून की मानद उपाधि दी गई थी तब तृणमूल कांग्रेस ने ही विवि की आलोचना की थी। अब वह क्या कहेगी ?

लोकसभा सांसद व माकपा की पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम कहते हैं कि यह घटना इस बात का सबूत है कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में चमचागिरी और तलवे चाटने की परंपरा कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने भी इस कथित गिरावट के लिए विवि प्रबंधन की आलोचना की है।

दूसरी ओर, कलकत्ता विवि की वाइस-चांसलर सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि ममता ने साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय काम किया है। इसके साथ ही औद्योगिक व सामाजिक क्षेत्र में भी उनका अहम योगदान है। इसी को ध्यान में रखते हुए विवि सीनेट व सिंडीकेट ने आम राय से उनको डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित करने का फैसला किया है।

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