सुनीता की गायन से बही सुर-सरिता, डुबते उतराते रहे लोग.....



--- हरेन्द्र शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

☆ बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय में शास्त्रीय गायन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग की ओर से शनिवार को पं• ओंकारनाथ प्रेक्षागृह में शास्त्रीय संगीत गायन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अमेरिका से आयी जैनपुर अतरौली घराने की शास्त्रीय संगीत साधिका सुनीता टिकारे का गायन हुआ। उन्होंने राग गावती में बिलम्बित रूपक ताल के बोल 'पार न पायो की.... से अपने गायन का आगाज किया। इसके बाद उन्होंने अद्ध ताल में बंदिश के बोल "पायलिया मोरी बाजे....." की प्रस्तुति कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इसी क्रम में उन्होंने राग पहाड़ी में दादरा के बोल "सैयां बिना घर सूना... के बाद अंत में "अजपा जपा जप जपो भी साधो... भजन की मनोहारी प्रस्तुति कर भक्तिसुधा बहाने में कामयाब रही। इनके साथ हारमोनियम पर डा• इंद्रदेव चौधरी और तबला पर पंडित कुबेरनाथ मिश्र ने सधी हुई अंदाज में संगत कर श्रोताओं पर गायन-वादन की छाप छोड़ने में कामयाब रहे।

इस अवसर पर अतिथि कलाकार सुनिता टिकारे को प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्रम भेंटकर प्रो• के• शशि कुमार, प्रो• शारदा वेलंकर, डा• रामशंकर ने सम्मानित किया। वहीं प्रो• ऋतिक सान्याल, प्रो• राजेश शाह, प्रो• रेवती साकलकर, डा• मधुमिता भट्टाचार्य सहित संकाय के विद्यार्थी भारी संख्या में मौजूद रहे। समारोह का कुशल संचालन डा• ज्ञानेशचंद्र पांडेय एवं प्रो• रेवती साकलकर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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