समृद्धशाली संस्कृति की पहचान है भोजपुरी - डा• अशोक सिंह



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

☆ बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केन्द्र में भोजपुरी परिचर्चा

वाराणसी, 30 अक्टूबर : भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए भोजपुरी भाषा का विकास जरूरी है। भोजपुरी भाषा समृद्धशाली सांस्कृति की पहचान बताती है, विरासत की हैसियत का बोद्य कराती है। यह बात काशी हिंदू विश्वविद्यालय कला संकाय के भोजपुरी अध्ययन केन्द्र की ओर से सोमवार को आयोजित भोजपुरी भाषा "दृश्य और परिदृश्य" विषयक परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि भारतीय प्रवासी केंद्र के राष्ट्रीय महासचिव डा• अशोक कुमार सिंह ने कही।

उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा के विकास के बगैर संस्कृति संरक्षण की बात करना बेमानी होगी। भोजपुरी को समृद्ध करने के लिए भोजपुरी भाषी लोगों के साथ ही सरकार का सहयोग जरूरी है। इस अवसर पर उन्होंने बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र की पुस्तकालय में पुस्तकों की खरीद के लिए को 25 हजार रुपये की सहयोग राशि देने की घोंषणा भी किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो• श्रीनिवास पाण्डेय ने कहा कि प्रारम्भिक भाषा के रूप में भोजपुरी माँ के दूध की तरह होती है। हमारी संस्कृति घान की संस्कृति रही है। सांस्कृतिक चेतना और अर्थगम्भीर्य से भरपूर भोजपुरी भाषा है जिसकी व्यंजक क्षमता अन्य भारतीय भाषाओं से काफी समृद्ध है।

मुख्य वक्ता डा• अर्जुन तिवारी ने कहा कि ग्रियर्सन की पुस्तक लिंग्विष्ट सर्वे ऑफ इंडिया के पांचवें अध्याय में लिखा है कि भोजपुरी वालो और बंगाली वालों ने हिंदुस्तानी भाषा को बढ़ाया है, भोजपुरी को स्थापित करने में ग्रियर्सन, राजेंद्र प्रसाद व राहुल सांकृत्यायन जी के विशेष स्थान त्रिदेव के रूप में है। भोजपुरी एक ऐसी भाषा रही है जिसमें रामभक्त व कृष्णभक्त दोनों समाहित है। ब्रज व अवधी की तरह अलग-अलग नहीं। जो अपनी भाषा अर्थात भोजपुरी से जुड़ा रहेगा वह अपनी संस्कृति से कभी नहीं कटेगा।

कवि मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी भाषा के विविध रूप है जिसमें साहित्य, सिनेमा, संगीत व कला के क्षेत्र में इसका अनेक दृश्य–परिदृश्य विद्यमान है, साथ ही अपनी रचनाओं के माध्यम से अपनी बात कही। भोजपुरी समाज बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है लेकिन अब जरुरत है कि हमें उठना होगा।

भोजपुरी फाउंडेशन के अध्यक्ष डा• अजय ओझा ने कहा कि आज़ादी के बाद धर्म पर भारी भाषा पड़ गयी। तमाम भाषाओं के आधार पर राज्यों का निर्माण हुआ मगर भोजपुरी का कोई एक राज्य नहीं बन पाया क्योंकि इसका विस्तार सीमाओं का अतिक्रमण करता है। हमारा विकास व समृद्धि तभी संभव है जब हम राज्याश्रित होगें।

विश्व भोजपुरी संघ के रास्ट्रीय महासचिव डा• अपूर्व नारायण तिवारी ने कहा कि सबसे पहले काशिका बोली सबसे पुरानी भाषा है जिसका केंद्र काशी है। उन्होंने भाषा और बोली के रूप में भोजपुरी भाषा को सबसे प्राचीन भाषा के रूप में तथ्यात्मक विश्लेषण देकर स्थापित किया है।

अंत में गायक राकेश तिवारी ने शिव वंदना की प्रस्तुति के बाद 'नदिया के पार' फिल्म का गीत गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुये भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो• श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि भोजपुरी भाषा के विकास व संवर्धन के लिए इसको आठवीं अनुसूची में शामिल करना जरुरी है। भोजपूरी को कलम की ताकत से ही मजबूती प्रदान किया जा सकता है तभी इसका विकास होगा।

संचालन भोजपुरी अध्ययन केंद्र के क्रियान्वयन समिति की सदस्या डा• शिल्पा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन शोध छात्र रूद्र प्रताप सिंह ने दिया। इस अवसर पर डा• रामाज्ञा शशिधर, डा• रामबक्स मिश्र, आनंद प्रकाश तिवारी, सुबोध त्रिपाठी, राजकुमार प्रसून सहित भारी संख्या में छात्र/छात्राएं मौजूद रही।

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