स्वास्थ्य सचिव ने कोविड-19 महामारी के अधिक मामलों वाले 30 नगर निगमों के साथ बातचीत की



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● उन्होंने कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की समीक्षा की

● रोगियों के स्वस्थ होने की दर बढ़कर 35.09 प्रतिशत हो गई है

प्रीति सूदन, स्वास्थ्य सचिव और राजेश भूषण, ओएसडी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने 30 नगरपालिका क्षेत्रों के प्रधान स्वास्थ्य सचिवों, नगर आयुक्तों, जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों के साथ शनिवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जो क्षेत्र पूरे देश में कोविड-19 मामलों में लगभग 80 प्रतिशत योगदान कर रहे हैं।

यह 30 नगरपालिका क्षेत्र निम्नलिखित राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब और ओडिशा।

कोविड-19 मामलों का प्रबंधन करने के लिए, नगर निगमों के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। यह सूचित किया गया कि शहरी बस्तियों में कोविड-19 के प्रबंधन को लेकर नए दिशा-निर्देश साझा किए जा रहे हैं। इस रणनीति की मुख्य बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। जिलों में कोविड-19 के संक्रमणों की वर्तमान स्थिति पर एक प्रस्तुति पेश की गई, जिसमें उच्च जोखिम वाले कारकों, पुष्ट दर, मृत्यु दर, दोहरीकरण दर, प्रति मिलियन परीक्षण आदि जैसे सूचकांकों पर प्रकाश डाला गया। उन्हें नियंत्रण क्षेत्र और बफर जोनों का ख़ाका बनाते समय ध्यान रखने वाले कारकों के बारे में जानकारी प्रदान की गई; नियंत्रित क्षेत्रों में की जाने वाली अनिवार्य गतिविधियां जैसे परिधि नियंत्रण, प्रत्येक घर की निगरानी के माध्यम से सक्रिय मामलों की खोज, संपर्क ट्रेसिंग, परीक्षण प्रोटोकॉल, सक्रिय मामलों का नैदानिक प्रबंधन; बफर जोन में निगरानी गतिविधियां जैसे एसएआरआई/ आईएलआई मामलों की मॉनेटरिंग, सामाजिक दूरी सुनिश्चित करना और हाथ की स्वच्छता को बढ़ावा देना आदि।

इस बात को रेखांकित किया गया कि सामान्य तौर पर नियंत्रित क्षेत्रों के भौगोलिक क्षेत्र को कारकों के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए, जैसे मामलों और संपर्कों की मैपिंग, मामलों और संपर्कों का भौगोलिक फैलाव, ठीक प्रकार से सीमांकित परिधि और प्रवर्धन वाले क्षेत्र आदि। नगर निगमों के लिए, आवासीय कॉलोनी/ मोहल्ला/ नगर निगम के वार्ड या पुलिस थाना क्षेत्र/ नगर निगम जोन/ कस्बा आदि को आवश्यकता के अनुरूप, नियंत्रित क्षेत्र के रूप में नामित किया जा सकता है। यह सलाह दी गई कि स्थानीय स्तर से तकनीकी जानकारी प्राप्त करने के बाद जिला प्रशासन/ स्थानीय शहरी निकाय द्वारा इस क्षेत्र को उचित रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। संगरोध क्षेत्रों के साथ, संचरण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए नियंत्रित क्षेत्र के आसपास के बफर जोनों को भी सीमांकित किया जाना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में कोविड-19 का प्रबंधन करने में, प्रवासी कामगारों के शिविरों के साथ पुराने शहरों, शहर की मलिन बस्तियों और उच्च घनत्व वाले अन्य इलाकों में उच्च सतर्कता और निगरानी को बनाए रखना बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।

संकेतकों के प्रबंधन के संदर्भ में, उच्च दोहरीकरण दर, मृत्यु दर के उच्च मामले और उच्च पुष्ट प्रतिशत दर नियंत्रित क्षेत्रों में देखी गयी है, इसलिए उन्हें संभावित वास्तविक कारणों के बारे में सूचित किया गया और संभावित कार्रवाइयों को करने के लिए सिफारिशों की प्रस्तुत की गईं। यह भी रेखांकित किया गया कि विशेष रूप से घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में भविष्य में सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार किए जाने की आवश्यकता है, जैसे खराब सामाजिक-आर्थिक स्थितियां, सीमित स्वास्थ्य अवसंरचना, सामाजिक दूरी का अभाव, अन्य कारकों के साथ महिलाओं के द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दे आदि।

स्वास्थ्य सचिव ने इस बात पर भी बल दिया कि कोविड-19 मामलों की रोकथाम और प्रबंधन के साथ-साथ, शहरी इलाकों में सभी आवश्यक गैर-कोविड स्वास्थ्य सेवाएं जैसे रमंचा + एन केयर, कैंसर उपचार, टीबी निगरानी, प्रतिरक्षीकरण प्रयास, आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए वेक्टर नियंत्रण उपायों को जारी रखना जैसे मुद्दों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। नगर निगम क्षेत्रों में भरोसा और विश्वास का निर्माण करने के लिए प्रभावी जोखिम संचार पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया। उनसे समुदायिक नेताओं और स्थानीय नेताओं के साथ जुड़ने का आग्रह किया गया जो स्थानीय निगरानी टीमों के साथ मिलकर स्थानीय समुदायों के माध्यम सहयोग प्राप्ति को प्रोत्साहित करने में सक्षम हो सकते हैं। मुंबई द्वारा "कंटेनमेंट लीडर्स" के अपने अनुभवों को साझा किया गया, जो स्थानीय समुदाय के बुजुर्गों और वार्ड अधिकारियों के साथ काम करने वाले अधिनायक हैं, विशेष रूप से झुग्गी समूहों में रहने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाए जाने वाले सरकारी प्रयासों का समर्थन करने के लिए। स्थानीय समाधान खोजने, विश्वास स्थापित करने और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए सामुदायिक नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

इस बात पर भी बल दिया गया कि प्राप्ति प्रतिशत, एसएआरआई/ आईएलआई निगरानी और मानव संसाधन प्रबंधन ज्यादा प्रभावी में सुधार लाने के लिए रोगियों की सही समय पर पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। यह सलाह भी दी गई कि सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को पर्याप्त सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान किया जाना आवश्यक है और इन फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों को कलंकित करने वालों के खिलाफ संचार को ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राहत और अलगाव शिविरों में स्वच्छता मानकों का रखरखाव और कोविड-19 से संबंधित मामले वाले घरों में कचरा प्रबंधन करने पर भी बल दिया गया।

अब तक कुल 30,150 लोगों को उपचारित किया जा चुका है। पिछले 24 घंटे में, 2,233 रोगियों को ठीक किया गया है। इससे हमारी कुल आरोग्य प्राप्ति दर 35.09 प्रतिशत हो गई है। वर्तमान में पुष्ट मामलों की कुल संख्या 85,940 है। कल से, भारत में कोविड-19 के पुष्ट मामलों की संख्या में 3,970 की वृद्धि दर्ज की गई है।

कोविड-19 से संबंधित तकनीकी मुद्दों, दिशा-निर्देशों और सलाहों के बारे में सभी प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए, नियमित रूप से देखें: https://www.mohfw.gov.in/ और @MoHFW_INDIA

कोविड-19 से संबंधित तकनीकी प्रश्नों को technicalquery.covid19@gov.in पर और अन्य प्रश्नों को ncov2019@gov.in पर ईमेल और @CovidIndiaSeva पर ट्वीट किया जा सकता है।

कोविड-19 से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर- : +91-11-23978046 or 1075 (टोल फ्री) पर कॉल करें।

कोविड-19 पर राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के हेल्पलाइन नंबरों की सूची https://www.mohfw.gov.in/pdf/coronvavirushelplinenumber.pdf पर उपलब्ध है।

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