--डाॅ• इन्द्र बली मिश्र,
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय,
वाराणसी, उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़
सावन मास में इस शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में शिव की पूजा करने से बाधाएं समाप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान शिव पृथ्वी का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों की खबर लेते हैं। उनके कष्टों को दूर करते हैं और अपना आर्शीवाद प्रदान करते हैं। इसलिए सावन में पड़ने वाले सोमवार पर भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।
■ मास शिवरात्रि का महत्व
इस शिवरात्रि पर विधि पूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव की पूजा की जाती है। मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। क्योंकि इस व्रत में व्यक्ति को अपने अवगुणों का त्याग करना होता है। शिव ही सत्य है। इसलिए जो व्यक्ति बुराई, लालच, और गलत कामों से दूर रहता है उसे भगवान शिव का आर्शीवाद प्राप्त होता है।
■ पूजा की विधि
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करें। इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है। अभिषेक के दौरान भगवान शिव की प्रिय चीजों का भोग लगाएं और शिव चालीसा और शिव मंत्रों का जाप करें।
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