--संजय पाठक,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
श्रीराम जन्मभूमि आयोध्या के लिए काशी की विश्व प्रसिद्ध रामनगर राममलीला की प्रतिकृति हनुमान मुखौटा राज्यमंत्री डॉ• दयाशंकर मिश्र दयालु को मंगलवार को काशी घाट वॉक की ओर आयोजित कार्यक्रम में गंगा के मध्य धार में भेंट किया गया। इस दौरान ताना-बाना ग्रुप के लोगों ने कबीरवाणी लोगों को सुनाया। अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि पूजन में यह मुखौटा भी मौजूद रहेगा।
इस दौरान मौजूद बीएचयू के भोजपुरी संकाय के समन्वयक प्रकाश शुक्ल ने कहा कि हनुमान के बगैर राम की सत्ता नहीं है, और तुलसी के बगैर हनुमान की सत्ता नहीं है, इसी क्रम में काशी के बगैर तुलसी की सत्ता नहीं है। इसलिए राम की सत्ता में काशी की सत्ता का होना अनिवार्य है, क्योंकि रामकथा का बहुत हिस्सा काशी में ही लिखा गया। इसी कारण यह अवसर बहुत महत्त्वपूर्ण है कि अपने आराध्य राम के निमित्त काशी के लोग राम के अनंयभक्त राम का मुखौटा भेज रहे है। इसके लिए काशी घाट वॉक की भूमिका सराहनीय है।
राज्यमंत्री डॉ• दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने भूमिपूजन की बधाई देते हुए कहा कि राम मंदिर के निर्माण में हर कोई अपना अंशदान दे रहे है, ठीक उसी प्रकार रामसेतु में जैसे गिलहरी ने अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि काशी में समस्त देवी-देवताओं का वास है, इसलिए काशी से मिला रामलीला प्रेमियों का मुखौटा अनूठा है।
काशी घाट वॉक के आयोजक डॉ• वी• एन• मिश्र ने कहा कि पहली बार ऐसा होगा जब रामनगर रामलीला की प्रतिकृति का दर्शन बनारस के बाहर होगा। घाट वॉक की ओर से राजेन्द्र प्रसाद द्वारा बनाई गई दो महीने में 2 फूट के मुखौटा भेंट किया गया है। भले भगवान का जन्म आयोध्या में हुआ हो, लेकिन जो रामलीला का मंचन काशी में होता है वह विश्वप्रसिद्ध है, यह मुखौटा काशी के साथ-साथ राममलीला का भी प्रतिनिधित्व करेगा।
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