--विजया पाठक (एडिटर-जगत विजन),
कोलकाता-पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
पश्चिम बंगाल में चुनावी रण शुरू हो गया है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे टीएमसी की सुपरिटेंडेंट ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। पिछले दिनों सांसद सहित 11 विधायकों और एक पूर्व मंत्री द्वारा टीएमसी को छोड़ भाजपा का दामन थाम लेने के घाव से टीएमसी प्रमुख अभी तक ठीक से उभरी भी नहीं थी, कि अब इस बार तगड़ा झटका सीबीआई द्वारा जारी शारदा चिटफंड घोटाले से जुड़ी हुई कार्यवाही से लगा है।
दरअसल ममता सरकार पर आरोप है कि बंगाल में मुख्यमंत्री राहत कोष के पैसे से घोटाले में फंसी तारा टीवी के कर्मचारियों को मई 2013 से लेकर अप्रैल 2015 के बीच सैलरी दी गई। इस फंड से 23 महीने तक कर्मचारियों की सैलरी का पैसा निकाला गया। इस दौरान तारा टीवी एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन को 6.21 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। ऐसा भी कहा जा रहा है कि इस पूरे घोटाले में टीएमसी के कई बड़े राजनेताओं के नाम शामिल है। ऐसे में ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती है कि वो कैसे चुनाव से ठीक पहले इस पूरे मामले से टीएमसी के राजनेताओं पर लगे दाग को मिटा पाएंगी या नहीं। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल की जनता जर्नादन बंगाल सरकार के मंत्रियों और राजनेताओं द्वारा किए गए भ्रष्टाचारों से वाकिफ है। यह पहला ऐसा मामला नहीं है जब करोडों रुपए के गबन का मामला सामने आया हो, इससे पहले भी टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार के अलग-अलग तरह के मामले सामने आ चुके है जिसमें अब तक न तो सही ढंग से कोई जांच हुई और न ही किसी भी आरोपी व्यक्ति पर कड़ी कार्यवाही की गई। देखा जाए तो बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी का आने वाले समय में सत्ता पर कायम रहने का रास्ता बहुत कठिन है।
एक तरफ भाजपा ने बंगाल में विजय पताका लहराने की पूरी तैयारी कर ली है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी पार्टी के साथ बंगाल में दस्तक देने के साफ संकेत दे चुके है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि विधानसभा चुनाव के दौरान होने वाला वोटों का बंटवारा कहीं टीएमसी को मुसीबत में डाल दे। जाहिर है पिछले दिनों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय समेत भाजपा नेताओं की रैलियों में उपद्रव मचाया है उसका परिणाम टीएमसी के लिए विपरीत साबित होते दिखाई दे रहे है। इसमें कोई दोराय नहीं कि कैलाश विजयवर्गीय की अगुवाई में भाजपा बंगाल में अपनी सत्ता काबिज करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और इस बार के विधानसभा चुनाव में वो बंगाल में सत्ता पलट कर नई इबारत लिखेगी।
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