अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस



वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी द्वारा "एचआईवी/ एड्स नियंत्रण वूमेन एज ए लीड" विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन भारत सरकार युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के क्षेत्रीय निदेशक डॉ• अशोक श्रोती ने की।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला में उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहायक निदेशक डॉ• रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने एड्स के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला।

दूसरे सत्र में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और ए आर टी सेंटर की प्रभारी डॉ• प्रीति अग्रवाल ने एचआईवी संक्रमण के कारण और महिलाओं के साथ हो रहे भेद- भाव पर प्रकाश डालते हुए ए आर टी सेंटर की गतिविधियों की जानकारी दी।

तीसरे सत्र में प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी हर्मेंद्र सिंह ने एचआईवी /एड्स के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान और महिला भागीदारी के विविध पक्षों पर जानकारी दी।

चौथे और अंतिम सत्र में उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहायक निदेशक डॉ• अनुज दीक्षित ने रेड रिबन क्लब के कार्यक्रमों की जानकारी दी और एचआईवी एड्स नियंत्रण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ• बाला लखेंद्र ने की और कार्यशाला के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन समाजिक विज्ञान संकाय की कार्यक्रम अधिकारी डॉ• सीमा मिश्रा ने किया। इस अवसर पर डॉ• लाल बाबू जायसवाल, डॉ• नेहा पांडे, डॉ• पूनम जयसवाल, डॉ• रंजीत कुमार आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

■ महिलाओं के संघर्ष एवं साहस को अनादिकाल से ही भारत में मान्यता मिली है और उनकी विशिष्ट शक्ति एवं उपलब्धियों को भारतीय ज्ञान परंपरा में वैदिक काल से ही स्वीकृति प्राप्त है। सार्वजनिक जीवन में विपुल उपस्थिति एवं ज्ञान-तर्क परंपरा में सार्थक हस्तक्षेप के द्वारा महिलाओं ने अपनी अग्रगण्य उपस्थिति से प्राचीन भारतीय परंपरा को अनुप्राणित किया है। हमें पश्चिमीकृत नारीवादी उपागम के बरक्श फिर से एक भारतीय नारीवादी उपागम की पुर्नस्थापना करनी है जिसमें नकल एवं अंधानुकरण की प्रवृत्ति ना हो और उसकी जड़े औपनिवेशिक ज्ञान मिमांसा से पूरी तरह अलग हो।

उपरोक्त बातें महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो• चंद्रकला पाड़िया ने आज महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र एवं यूनेस्को शांति पीठ, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवं शांति तथा विकास केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम के मंच पर कहीं।

विशिष्ट वक्ता प्रो• रमादेवी निमापल्ली, संकाय प्रमुख, पशुविज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने व्यक्तिगत जीवन के उदाहरण से यह बात रेखांकित की कि साहस एवं चुनौतियो का मुकाबला करके अपेक्षित लक्ष्य पाया जा सकता है। उन्होनें स्त्री-पुरूष के अवसर की समानता पर बल दिया।

अतिथियों का स्वागत केन्द्र के समन्वयक प्रो• मनोज मिश्रा एवं विषय प्रवर्तन यूनेस्को चेयर प्रो• प्रियंकर उपाध्याय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पूर्व संकाय प्रो• अंजू शरण उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से केन्द्र के सहआचार्य, शोधार्थी एवं छात्र-छात्रा उपस्थिति थे।

■ प्रसूति तंत्र विभाग एवं विकृति विज्ञान विभाग आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से 8 तारीख को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर "महिला सशक्तिकरण" पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी का उद्घाटन डॉक्टर सुनीता चंद्रा, संयुक्त कुलसचिव, आरएसी, बीएचयू एवं रीमा रॉय, उपाध्यक्ष, एनडीआरफ, वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन वाराणसी ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर सुनीता सुमन विभागाध्यक्ष प्रसूति तंत्र, प्रोफेसर संगीता गहलोत, कार्यकारी संयोजक डॉक्टर प्रियदर्शनी तिवारी, कार्यकारी सचिव डॉ• अनुराधा रॉय, कार्यकारी उपसचिव डॉ• प्रीति चौहान उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथियों एवं सभागार में उपस्थित सभी महिला अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्षा प्रोफेसर सुनीता सुमन ने हर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ• सुनीता चंद्रा संयुक्त रजिस्ट्रार, आरएसी, बीएचयू ने महिला सशक्तिकरण पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि महिलाएं पुरुषों से ज्यादा क्षमतावान होती है तथा महिलाओं का समाज के विकास में मुख्य योगदान है।

विशिष्ट अतिथि रीमा रॉय, उपाध्यक्ष, एनडीआरएफ वैलफेयर एसोसिएशन ने महिला सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए महिला व पुरुष को हर क्षेत्र में समानता का अधिकार दिए जाने की बात पर जोर दिया।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ताओं में प्रोफेसर उर्मिला रानी श्रीवास्तव, डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलॉजी फैकल्टी ऑफ सोशल साइंस, डॉ• बबीता बेरिया, असिस्टेंट प्रोफेसर फैकल्टी ऑफ लॉ बीएचयू एवं प्रोफेसर मेजर अंजलि रानी, गाइनेकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान बीएचयू आदि ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी में लगभग 150 की संख्या में आयुर्वेद संकाय की महिला प्रोफेसर, सह आचार्या, शोध विद्यार्थी, चिकित्सक एवं महिला विद्यार्थियों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर प्रियदर्शनी तिवारी ने किया। सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ• अनुराधा रॉय ने किया।

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