माहाराष्ट्र में जो भी हो रहा है शर्मसार करने वाला ही है



--परमानंद पांडेय,
अध्यक्ष - अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास,
राष्ट्रीय संयोजक - मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच, उत्तर भारत।

फंसे ये तीन पहियों वाली सरकार सत्ता में आई है तबसे सरकार की मर्यादा विश्वसनीयता समाप्त होती जा रही है। जिस लोकतंत्र की कल्पना बाबा साहब अंबेडकर जैसे संविधान निर्माताओं ने की थी उसकी धज्जियां उड़ रही हैं। पूरी तरह यही लग रहा है कि जिस प्रकार भी हो लूट मचाओ लूट के पैसों का बंदरबांट करो। जब सरकार पर आरोप लगे तो उसे यह कहकर नकार दिया जाए कि सब केंद्र की साजिश है।

अभी परमवीर सिंह ने लंबा चौड़ा पत्र लिखा मुख्यमंत्री को ओर आरोप लगाया कि राज्य के गृहमंत्री पुलिस अधिकारियों को बाध्य कर रहे हैं कि हर महीने सौ करोड़ वसूल कर गृहमंत्री अनिल देशमुख को दिया जाए। परमवीर सिंह अभी हाल तक मुम्बई के पुलिस कमिश्नर थे। ये पूरी तरह सरकार के कहने पर हर गलत काम करने को तैयार भी रहते थे। किन्तु इनका ये पत्र जब जनता के सामने आया तो इतनी बात साफ तो हो ही गई कि माहाराष्ट्र सरकार जनता की नजरों में कठघरे में खड़ी हो चुकी है। परमवीर सिंह के इस पत्र बम के बाद तूफान आ गया। पहले तो लगा कि मुख्यमंत्री गृहमंत्री अनिल देशमुख का इस्तीफ़ा लेंगे या यदि वे इस्तीफा देने को नहीं तैयार हुए तो उन्हें हटा दिया जाएगा। माहाराष्ट्र के घाघ नेता एनसीपी के सर्वेसर्वा शरद पवार सक्रिय हो गए। उन्होंने एक बयान दिया कि परमवीर सिंह ने जो आरोप लगाए हैं वे गंभीर तो हैं किन्तु कोई प्रमाण नहीं है। साथ में यह भी जोड़ दिया कि मुख्यमंत्री उद्भव ठाकरे ही निर्णय लेंगे।

शुरू में तो लगा कि उद्भव ठाकरे साख बचाने के लिए कम से कम अनिल देशमुख को तो हटा ही देंगे। पर शरद पवार ने लगता है तिकड़म चला कि एनसीपी की छीछालेदर नहीं हो क्योंकि गृहमंत्री तो एनसीपी के ही हैं और इसिलए बैठक हुई तीनों घातक दलों की और लगता है यही फैसला हुआ कि अनिल देशमुख को नहीं हटाया जायेग। अब तो इस खबर के आने के बाद यह साफ हो चला है और पूरा साफ हो ही जायेगा कि यह भ्रष्ट सरकार चलती रहेगी।

इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पहले चुप रही पर बाद में उसने यह कहना शुरू किया कि परमवीर सिंह ने केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में बयान दिया होगा। कांग्रेस को लगा कि इस सियासी भूचाल के कारण कहीं ये तीन पहिए की सरकार ही न चली जाए। सोनिया गांधी को पार्टी चलाने के लिए और अन्य कारणों से भी पैसों की जरुरत है। माहाराष्ट्र एक दुधारू गाय है इसीलिए कांग्रेस ने लीपापोती करने में पावर का साथ दिया। उद्भव को भी लाइन पर आना पड़ा। किरकिरी तो शिवसेना की हो ही रही थी क्योंकि सचिन वाझे को 15 वर्षों तक निलंबित रहने के बाद भी उद्भव ठाकरे ने उन्हें फिर से नौकरी में वापस लिया। यानी वे शिवसेना के खांस हैं। परमवीर सिंह भी उनके चहेते हैं। इसलिए कांग्रेस और एनसीपी के दबाव में उद्भव ठाकरे आ गए हैं। अब तत्काल इस भ्रष्टतम सरकार को मोहलत मिल गई है।

माहाराष्ट्र में लूट खसोट जारी रहेगा इतने बड़े घृणित शर्मसार करने वाले आरोपों के लगने के बाद भी किसी तरह की जांच भी शायद नहीं ही होगी। बड़े बड़े उद्योगपतियों को धमका चमका कर वसूली और उगाही की जाती रहेगी। आवश्यकतानुसार मनसुख जैसों की हत्या भी होती रहेगी।

और प्रदेश और देश यह सब तमाशा अभी तो देखता ही रहेगा इस भ्रष्ट सरकार को अपने बचाव के लिए ये बयान तो हमेशा तैयार है ही कि मोदी सरकार हमें तंग करती रहती है।

जाना तो इस सरकार को है, लेकिन अभी माहाराष्ट्र को क्षत विक्षत करने का खेल कुछ और समय तक जारी ही रहेगा।

फिर भी लोकतंत्र जिंदा रहे, इसके लिए मोदी जी लगे ही रहेंगे, आशा की किरण तो वही हैं।

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