महाराष्ट्र में राजनीतिक तूफान



--परमानंद पांडेय,
अध्यक्ष - अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास,
राष्ट्रीय संयोजक - मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच, उत्तर भारत।

जब से मुकेश अम्बानी के घर के सामने स्कार्पियो गाड़ी मिली, उसमें विस्फोटक छर्रे मिले, एक पत्र भी मिला उसी समय से माहाराष्ट्र की राजनीति में तूफान आने की शुरुआत हो गई। उसी समय से लगने लगा था कि यह मामला भारी तूल पकड़ेगा। सबसे पहले स्कोर्पियो के मालिक मनसुख हीरेन के संदिग्ध मौत की खबर आईं। केंद्र सरकार ने आतंकी कनेक्शन की संभावना को देखते हुए एनआईए जांच का आदेश दे दिया। चर्चित पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को एनआईए ने गिरफ्तार कर अपने कस्टडी में लेकर पूछताछ करना शुरू कर दिया। राज खुलने लगे। शिवसेना ने सस्पेंडेड सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाझे को वर्षों के निलंबन के उपरंत अपनी सरकार बनते ही नौकरी में वापस ला दिया। मनसुख हीरेन की पत्नी ने सचिन वाझे पर अपने पति की हत्या में संलिप्तता का आरोप लगाया। एनआईए ने मनसुख हीरेन की हत्या मामले की जांच भी अपने हाथ में ले ली। उधर राज्य सरकार भी हत्या मामले की जांच करा रही थी।

इसी बीच चर्चित पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह को उद्भव सरकार ने पद से स्थानांतरित कर दिया। अचानक परमवीर सिंह ने एक आठ पन्ने की चिट्ठी मुख्यमंत्री को भेजी जिसमें कई प्रमाणों के साथ बताया गया कि माहाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाझे सहित कई पुलिस अधिकारियों को कहा कि प्रत्येक महीने 100 करोड़ की रकम वसूल कर उन्हें पँहुचाई जाए। यह एक ऐसा मामला सामने आ गया जो देश के अंदर अपने तरह की पहली घटना थी। माहाराष्ट्र सहित पूरे देश में इस बात की चर्चा होने लगी। राजनीतिक गलियारों में यह खबर आम हो गई कि गृहमंत्री अनिल देशमुख इस्तीफा दे देंगे। परंतु फिर अचानक बात सामने आई कि माहाराष्ट्र की तीन पहिए की सरकार ने शरद पवार के दबाव में निर्णय ले लिया कि अनिल देशमुख त्यागपत्र नहीं देंगे। शरद पवार ने प्रेस वार्ता में इस बात की घोषणा कर दी।

बीजेपी हमलावर हो गई। वहीं संसद के दोनों सदनों में इस मामले को लेकर बीजेपी ने दोनों सदनों की कार्यवाही को ठप्प किया।

पुनः शरद पवार मीडिया के सामने आए और फिर से अनिल देशमुख को निर्दोष करार दे दिया। भाजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शरद पवार के इस कथन को झूठ करार दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि परमवीर सिंह का यह कहना गलत है कि संजय वाझे को अनिल देशमुख ने अपने घर पर बुलाया था। शरद पवार ने मीडिया से कहा कि जिस दिन की बात परमवीर सिंह उठा रहे हैं उस 15 फरवरी को अनिल देशमुख कोरोना को लेकर अस्वस्थ थे। शरद पवार ने ज्योंही मीडिया से यह कहा तुरत भाजपा ने एक वीडियो जारी किया जिसमें 15 फरवरी को अनिल देशमुख एक प्रेस वार्ता कर रहे थे। फडणवीस ने शरद पवार को झूठा साबित कर दिया।

इधर खबर आई कि परमवीर सिंह उच्चतम न्यायालय पंहुच गए और एक याचिका दाखिल कर अनिल देशमुख के 100 करोड़ वसूली कर मांगे जाने के मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर डाली है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। अब जो सियासी और कानूनी हालात बन रहे हैं लगता है माहाराष्ट्र सरकार नहीं बच पाएगी। इस अराजक भ्रष्टाचारी सरकार को अविलम्ब जाना ही चाहिए।

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