ममता के दीवाने रहमान : 33 साल से इकट्ठा कर रहें हैं तस्वीरें



--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहचान राजनीति के कारण ही है ? लेकिन राजनीति से दूर रहने वाले रहमान को देख कर तो ऐसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उन्हें राजनीति नहीं भाती है, इसलिए कभी किसी राजनीतिक दल की रैली या सभा में नहीं जाते हैं। उन्हें तो बस एक नशा है और वह बढ़ता ही जा रहा है। यह नशा ममता बनर्जी की तस्वीरों को इकट्ठा करने का है।

बीते 33 साल से यह शख्स उनकी तस्वीरों को इकट्ठा कर रहा है। सिलीगुड़ी के शांतिनगर स्थित बउबाजार के रहने वाले अनसर रहमान ने अपने घर को ममता की तस्वीरों से संग्रहालय बना डाला है।

रहमान पेशे से चित्रकार हैं। पहले वे कोलकाता के टालीगंज में रहते थे लेकिन 1990 से सिलीगुड़ी में रहने लगे हैं। जब टालीगंज में रहते थे एसयुसीआई के छात्र संगठन डीएसओ के सदस्य थे। तब ममता बनर्जी के साथ थोड़ी बहुत बातचीत भी होती रहती थी। लेकिन इसके बाद वे कभी उनके साथ नहीं मिले। बीते 27 सालों के दौरान ममता बनर्जी कांग्रेस से सांसद चुनी गई, केंद्रीय मंत्री का पद संभाला, बाद में अपने दल तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल किया और अब दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर विदेश दौरे से लौटी हैं।

रहमान सिलीगुड़ी जाने के बाद राजनीति के करीब भी नहीं गए। लेकिन ममता की तस्वीरें इकट्ठा करने का अजीब शौक उन्हें लग गया। उनका कहना है कि 1984 से लेकर अब तक शायद ही ऐसी कोई तस्वीर होगी, जो उनके पास मौजूद नहीं है। प्रतिदिन सुबह उनका पहला काम सारे अखबार खरीदना और उन अखबारों से ममता की तस्वीरों को काट कर अलग करना होता है। इसके बाद तस्वीरों को कभी किसी एलबम में तो कभी उस तस्वीर से पोस्टर बना डालते हैं। अब उनका एक ही उद्देश्य है कि इन तस्वीरों को किसी संग्रहालय में रख सकें।

उन्होंने अपने हाथों से भी ममता की हर तरह की तस्वीरें बनाई हैं। ममता बनर्जी के राजनीतिक संघर्ष की कहानी अगर देखनी हो, तब आपको उनके घर जाना पड़ेगा। वहां की दीवारों पर हर तरह की कहानी बयां होती दिखने लगेगी। ममता के इतने चाहने वाले हैं कि टीवी पर जब भी उन्हें देखते हैं, सारा काम-धंधा छोड़ कर टीवी के सामने बैठ जाते हैं। शादी के बाद उनकी पत्नी अर्चना जब पति के घर पहुंची तो उनका नशा देख कर परेशान हो गई थी, लेकिन समय गुजरने के बाद हालात बदल गए हैं। अब वे भी जहां ममता की तस्वीर देखती हैं, घर लेकर आ जाती हैं। पति अगर घर में नहीं मिलते, तब उस तस्वीर को काट कर एलबम में लगा देती हैं। इतना ही नहीं, कभी पति को अखबार में ममता की खबर पढ़ कर सुनाती हैं कि उन्होंने क्या कहा है। इस तरह पति-पत्नी दिन भर ममता की तस्वीरों को लेकर ही व्यस्त रहते हैं। अब उन्होंने अपने घर में ममता के बारे में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया है, जिसमें सारी तस्वीरें, एलबम और अखबार रखे गए हैं। मुहल्ले के लोग उन्हें देखने के लिए पहुंच रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी सूचना मिलने पर प्रदर्शनी देखने पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी में आने वाले लोगों का वे मुंह मिठा करवा रहे हैं। इस प्रदर्शनी में अपनी बनाई ममता की पेंटिंग भी उन्होंने सजा रखी है और चाहते हैं कि यह तस्वीर मुख्यमंत्री के कार्यालय में रखी जाए।

राज्य के मंत्री गौतम देव भी उनकी प्रदर्शनी देखने के लिए गए और आश्वासन दिया कि उनकी बनाई एलबम को मुख्यमंत्री तक पहुंचा देंगे। प्रदर्शनी के कारण पहली बार मीडिया उनके घर पहुंचा और खबरें छाप रहा है। अर्चना और रहमान का कहना है कि हम किसी राजनीतिक दल को पसंद नहीं करते लेकिन मनुष्य के तौर पर ममता को बेहद पसंद करते हैं।

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