मानस की चौपाईयों से गूंजा हनुमत दरबार



--- हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी।

● संकटमोचन मंदिर में मानस नवाह पाठ शुरु

वाराणसी : मार्गशीर्ष मास, शुक्‍लपक्ष पंचमी को श्रीराम विवाह के अवसर पर गुरूवार को श्री संकटमोचन मंदिर में 52वें श्रीरामचरित मानस नवाह पाठ यज्ञ का शुभ्‍ाारंभ हुआ। मानस मर्मज्ञों के द्वारा मानस की चौपाईयों के सस्वर उच्चारण से संकटमोचन दरबार गूंजायमान हो उठा।

वर्ष 1966 में साकेतवासी महंत प्रो• वीरभद्र मिश्र जी की प्रेरणा से साकेतवासी सत्‍य प्रसाद मेहरा ने श्रीसंकटमोचन मंदिर में मानस नवाह पाठ शुरू कराया था। तभ्‍ाी से यह अनवरत चला आ रहा है। गुरुवार को प्रात:काल संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो• विश्‍वम्‍भरनाथ्‍ा मिश्र ने मानस पोथ्‍ाी, व्‍यास गादी व व्‍यास डा• राधाकांत ओझा का वेद मंत्रो के बीच पूजन व माल्‍यार्पण किया। तत्‍पश्‍चात 111 ब्राम्‍हणों का पूजन अर्चन कर पाठ का शुभारंभ्‍ा किया गया। यजमान प्रेमचन्‍द्र मेहरा व उनके पुत्र तनु व मनु मेहरा ने महंत जी का माल्‍यार्पण कर विधि-विधान से पूजन किया।

श्रीरामविवाह पंचमी पर शुरू यह पाठ नौ दिनों तक चलेगा। 23 नवम्बर को बालकांड के दोहों व चौपाइयों से मंदिर प्रांगण गूंज उठा। इस अवसर पर संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो• विश्‍वम्‍भर नाथ्‍ा मिश्र ने कहा की प्रतिवर्ष भगवान श्रीराम के विवाह पर यह आयोजन होता है। सुबह श्रीरामचरित मानस का पाठ व सायंकाल व्‍यास सम्‍मेलन का आयोजन होता है जिसमें देश के काेने कोने से आये मानस मर्मज्ञ श्रीरामचरित मानस का वर्णन करते है।

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