---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।
कोलकाता, 2 दिसंबर। देश के महंगे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कभी बच्चों की हत्या तो कभी शारीरिक तौर पर उत्पीड़न करने की घटनाओं से अभिभावक यह सवाल उठा रहे हैं कि जब देश का भविष्य स्कूलों में ही सुरक्षित नहीं है, तब अच्छे दिनों का सपना ही लोग देखते रह सकते हैंं। इसके साथ ही स्कूलों की ओर से लापरवाही के बाद लीपापोती की कोशिश करने से लेकर कानून की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। हाल में स्कूल में एक बच्चे की मौत के बाद गरीब को गिरफ्तार किए जाने से महंगे स्कूलों में पैसे वालों के प्रति रवैये के बारे में भी देश के लोगों को पता चला है।
महानगर के एक प्रसिद्ध स्कूल में चार साल की बच्ची से की गई घटना के बाद भले ही पीटी शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन यह न तो पहली घटना है और न ही यह अंतिम घटना हो सकती है। जी• डी• बिड़ला स्कूल में चार साल की बच्ची से दो शिक्षकों ने यौन उत्पीड़न किया लेकिन आरोप है कि स्कूल वालों की ओर से शिकायत मिलने पर कहा गया कि बच्चा कहानी बना रहा है। इसके पहले 2017 में ही दमदम में किशोर भारती स्कूल में शिक्षकों के साथ शूटिंग के दौरान एक छात्र की मौत के बाद भी स्कूल के खिलाफ आरोप लगा था कि लापरवाही का स्पष्ट सबूत रहने पर भी डेढ़ महीने तक स्कूल प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
साउथ प्वायंट स्कूल में 2014 में बेहोशी की हालत में मिलने पर छात्र को अस्पताल लेकर जाने के बाद मौत हो गई थी। आरोप लगा कि स्कूल की ओर से छात्र को बेहोशी की हालत में तीन जगह से मिलने की कहानी सुनाई गई। लेकिन वह क्यों बीमार हुआ, इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया। दमदम क्राइस्ट चर्च स्कूल में ऊंची कक्षा की एक छात्रा की रैगिंग के बाद हत्या और डीपीएस न्यू टाउन के एक छात्र की मौत गले में खाना फंसने से हुई लेकिन 2013 की घटनाओं में आरोप लगा कि स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों की किसी तरह की बात सुनने के बजाए एक पक्ष की बात सुनकर फैसला किया गया। इतना ही नहीं, नजदीक अस्पताल रहने के बावजूद देरी से अस्पताल लेकर जाया गया।
जी• डी• बिड़ला स्कूल की ताजा घटना के बारे में छात्रा के पिता का कहना है कि उसने स्कूल में जाकर सारी घटना बताई थी, लेकिन अध्यक्ष ने घटना से इंकार किया। उनका कहना था कि चार साल की बच्ची कहानी बनाकर कह रही है। शनिवार को अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि स्कूल सरकारी हो या प्राइवेट बच्चों की बात को प्रमुखता से सुना जाना चाहिए।
इसके साथ ही गुड टच-बैड टच के बारे में भी सतर्कता की जरुरत पर जोर दिया जा रहा है। अचानक बच्चों का लोगों से मिलना जुलना बातचीत बंद कर देना, स्कूल व एक्टिव सेंटर जाने में हिचकिचाए, बहुत परिचित बच्चों को कहीं लेकर जाना चाहे और वह इंकार करे, बच्चा अगर कुछ कहने की कोशिश करें तो उसे सुनें और यह पता लगाने की कोशिश करें कि आखिर माजरा क्या है ?
इतना ही नहीं, कुछ लोग बच्चों के साथ ज्यादा दुलार करना चाहते हैं। बच्चा अगर इंकार करे तो ऐसे परिचित या रिश्तेदार को बच्चों को हाथ लगाने से सख्ती के साथ रोका जाना चाहिए। कुछ लोग अकेले में बच्चों के साथ मिलते हैं, ऐसे लोगों पर नजर रखी जानी चाहिए। कोई अगर महंगे उपहार दे रहा है, भले ही कितना करीबी हो, उस पर नजर रखनी चाहिए।
बाल मनोचिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को शुरू में ही पता दिया जाए कि यह गुप्तांग हैं, जिसे माता-पिता या डाक्टर को छोड़ कर कोई स्पर्श नहीं कर सकता। तैराकी के दौरान भी लड़के-लड़की को कहां हाथ नहीं लगाने देना है, यह उसे बताया जाना चाहिए, जिससे कि शिक्षकों को वे सतर्क कर सकें। बच्चों को साफ बताएं कि कोई गलत हरकत करता है तो उसका विरोध करें, ऐसा नहीं कि बच्चों को ही डांटने लगे। उनका कहना है कि बच्चों के साथ बातचीत में स्कूल, परिवार और आसपास के लोगों की हरकतों के बारे में जानकारी हासिल करें और बच्चे को ना मतलब ना कहना सिखाएं, जिससे वह किसी भी गलत हरकत का दृढ़ता से विरोध कर सके।
हालांकि अभिभावक भी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कुछ करने के बजाए अपने बच्चे को दूसरे स्कूल में ले जाते हैं, जिससे मामला रफा-दफा हो जाता है। तीन साल पहले जी• डी• बिड़ला सेंटर फार एजुकेशन स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान रवींद्र सरोवर में आया के बजाए बस के चालक और कंडक्टर छात्रा को शौचालय लेकर गए और आरोप लगा कि उन्होंने बलात्कार किया। प्राइवेट अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट से आरोप की पुष्टि भी हुई। पहले तो स्कूल और छात्र के परिवार को प्रबंधन द्वारा इज्जत खराब होने के डर से पुलिस में जाने से रोका गया और प्रबंधन की ओर से मामले की जांच का भरोसा दिया गया। हालांकि स्कूल प्रबंधन आरोप मानने को तैयार नहीं थे, बाद में लोगों का दबाव बढ़ने पर माने और आया को निलंबित करके कार्रवाई शुरू की। यादवपुर थाने में शिकायत के बाद दोनों अभियुक्त गिरफ्तार हुए। छात्रा को अभिभावकों ने दूसरे स्कूल में भर्ती कर दिया। पुलिस के मुताबिक अभिभावक बाद में केस लड़ने के लिए तैयार नहीं थे, जिससे अदालत में याचिका दायर करके केस बंद कर दिया गया और अभियुक्त छूट गए।